लोगों मे कैश की कमी रोकने को बैंक सस्ता कर रहे लोन

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कोरोना वायरस के कारण किये गये लॉकडाउन की वजह से उत्पन्न कैश की कमी को पूरा करने के लिये बैंकों ने अपनी नीतियों मे बदलाव करते हुए लोन को सस्ता करने का फैसला लिया है | इसी के तहत स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ने अपने लोन को ग्राहकों के लिये सस्ता किया था |

देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के बाद अब बैंक ऑफ इंडिया ने भी ग्राहकों को राहत दी है। बैंक ऑफ इंडिया ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में कटौती का पूरा लाभ ग्राहकों को देने का फैसला किया है।

एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट्स में कमी

बैंक ऑफ इंडिया ने रविवार को एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट्स में 75 आधार अंक यानी 0.75 फीसदी की कटौती कर दी है। इस कटौती के बाद एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट घटकर 7.25 फीसदी हो गई है। बैंक द्वारा ब्याज दरों में यह कटौती एक अप्रैल से प्रभावी होगी। 

MCLR में भी हुई कटौती

इसके अतिरिक्त बैंक ने मार्जनिल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट्स (MCLR) में भी कटौती की ह। यह 0.25 फीसदी कम हो गई है। यह कटौती सभी अवधि के लिए की गई है। एक साल से एक महीने तक की अवधि के लिए 0.25 फीसदी की कटौती की गई, जबकि रातभर की अवधि के लिए 0.15 फीसदी। एक साल के लिए बैंक का एमसीएलआर अब 7.95 फीसदी सालाना हो गया है। 

रेपो रेट में 15 साल में सबसे बड़ी कटौती

रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को घोषित 7वीं द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर रेपो में 0.75 फीसदी की कटौती कर दी थी। यह पिछले 15 साल में सबसे बड़ी कटौती बताई जा रही है। इसे 5.15 फीसदी से घटाकर 4.40 फीसदी कर दिया गया है। वहीं केन्द्रीय बैंक ने कोरोना वायरस को रोकने के लिए 21 दिन के लॉकडाउन (बंद) को देखते हुए लोगों की आय और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए कर्ज की किस्त के भुगतान पर भी तीन माह तक रोक लगाने की बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अनुमति दी है।

एसबीआई ने ग्राहकों को दिया रेपो दर में कटौती का पूरा लाभ

आरबीआई द्वारा रेपो रेट में कटौती के बाद सबसे पहले एसबीआई ने एक वक्तव्य में कहा है कि उसकी नई घटी दर बाहरी मानक दर से जुड़ी कर्ज दर (ईबीआर) और रेपो दर से जुड़ी कर्ज दर (आरएलएलआर) के तहत कर्ज लेने वाले ग्राहकों पर लागू होगी। नई ब्याज दर एक अप्रैल 2020 से प्रभावी होगी। एसबीआई ने बाहरी मानक दर से जुड़ी कर्ज दर को 7.80 फीसदी से घटाकर 7.05 फीसदी वार्षिक कर दिया, जबकि आरएलएलआर को 7.40 फीसदी से घटाकर 6.65 फीसदी किया।

 


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