राम मंदिर ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री मोदी से की मुलाकात, दिया अयोध्या आने का न्योता

Pm Modi met members of the Ayodhya Ram Temple trust

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रबंध महंत नृत्य गोपाल दास समेत ट्रस्ट के सदस्यों ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली स्थित उनके आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर मुलाकात की और उन्हें भव्य राम मंदिर के शिलान्यास के लिए अयोध्या आने का निमंत्रण दिया। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए हाल ही में गठित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की पहली बैठक दिल्ली में बुधवार को हुई थी।

महंत नृत्य गोपाल दास को चुना गया अध्यक्ष

न्यास की दिल्ली में बुधवार को हुई बैठक में महंत नृत्य गोपालदास को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास का अध्यक्ष, विहिप के चंपत राय को महासचिव एवं पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह नृपेन्द्र मिश्रा को भवन निर्माण समिति का चेयरमैन बनाया गया है। स्वामी गोविंददेव गिरि जी को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। अयोध्या में भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में न्यास का बैंक खाता खोलने का निर्णय किया गया है।

गौरतलब है कि शीर्ष अदालत द्वारा राम मंदिर के पक्ष में फैसला देने व मंदिर निर्माण के लिए न्यास के गठन के आदेश पर 5 फरवरी को केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने लोकसभा में ट्रस्ट का ऐलान किया था।

प्रधानमंत्री ने ट्रस्ट के सदस्यों को मिलने के लिए बुलाया था

ट्रस्ट के मिलने आये सदस्यों को प्रधानमंत्री ने सम्मान किया और आशा जताई कि जनभावना की आकांक्षा के अनुरूप ही भव्य राम मंदिर का निर्माण होगा। लगभग 15 मिनट की बैठक में प्रधानमंत्री ने सभी को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया तो महंत नृत्य गोपाल दास ने पीएम को प्रसादी चुनरी भेंट की। नृत्य गोपाल दास जी ने बताया कि उन्होंने मौखिक रूप से प्रधानमंत्री को अयोध्या आने का न्योता दिया है।

नृपेंद्र मिश्रा को बनाया गया मंदिर निर्माण समिति का प्रमुख

बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की मंदिर निर्माण समिति का प्रमुख बनाया गया है। फिलहाल, मंदिर निर्माण कब से शुरू होगा इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है। अगली बैठक अयोध्या में होगी जिसमें मंदिर निर्माण की तारीख का एलान किया जा सकता है।

एक प्रशासक के रूप में नृपेंद्र मिश्रा का अनुभव बहुत लंबा है और उन्होंने राम मंदिर आंदोलन को बहुत नजदीक से देखा है। अगर वर्तमान परिप्रेक्ष्य मे देखा जाए तो उनकी मौजूदगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच को जमीन पर उतारेगी। ध्यान रहे कि 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद पहला अध्यादेश उन्हें पीएमओ में प्रमुख सचिव बनाने को लेकर ही जारी किया गया था। दूसरे कार्यकाल में भी वह बरकरार रहे हालांकि कुछ दिनों बाद ही उन्होंने जिम्मेदारी से मुक्ति का आग्रह किया था।