जन जन में राम, कण कण में राम

जनजन के राम हैं। वह लोगों के दिलों में बसते हैं, तभी उन्हें लोकनाथ कहा जाता है, इस भूलोक और संस्कृति दोनों में राम समाहित हैं। हजारों साल बाद भी श्री राम को लेकर लोगों की आस्था कम नहीं हुई है। तभी लॉकडाउन के दौरान दूरदर्शन पर फिर से दिखाई गई, रामायण धारावाहिक को 16 अप्रैल को 77M लोगों ने समूचे विश्व में देखा जो एक विश्व रिकार्ड बन गया है।

 

राम के प्रति आस्था

विश्व के हर इंसान के अंदर रचे बसे हैं राम, हर घर में राम हैं तभी तो राम को लेकर हमारी आस्था ही है कि हम सुख हो या दुख हर बात को  राम के साथ जोड़े होते हैं। राम के प्रभाव का मूल है रामकथा। तभी तो कहा जाता है, राम से बड़ा राम का नाम। जनमानस में राम कथा क्यों रचीबसी है? इसलिए कि राम का चरित्र आदर्श पुत्र, आदर्श शिष्य, आदर्श भाई, आदर्श मित्र, आदर्श वीर और आदर्श राजा के रूप में सभी को आकर्षित करता है। ये उनसे अनुराग ही है कि हजारों सालों से हम रामलीला का मंचन कहीं हो रहा होता है तो उसे देखने जरूर जाते हैं। राम रस का पान करने का मन हमेशा होता ही रहता है। तभी तो विश्व में रामायण ने फिर से एक नया इतिहास रच दिया है। इतना ही नही जब ये सीरियल पहली बार पर्दे पर आया था तब भी इस सीरियल ने कुछ ऐसा ही धमाल मचाया था वैसे उस वक्त लॉकडान नही लगा हुआ था लेकिन रामायण के शुरू होते ही देश में लॉकडाउन जैसा ही महौल बन जाता था।

हरि अंनत हरिकथा अनंता

पूरी दुनिया में लोकप्रिय है राम और उनकी कथाएं बिल्कुल इस कहावत की तर्ज पर–  हरि अंनत हरिकथा अनंता। राम देश के जनमानस में गहरे रचेबसे हैं। आज भी टीवी और फिल्म, कंम्प्यूटर, इंटरनेट, मोबाइल, सोशल मीडिया के प्रचलन के बाद राम कथा लोगों को इस कदर आकर्षित करती है कि वे उनकी कथा को बारबार सुनने को लालायित रहते हैं। ऐसा इसीलिए है, क्योंकि राम का सारा जीवन आदर्श के सबसे ऊंचे मानकों पर आधारित हैं। उन्होंने जीवन में जो कुछ किया, अपने लिए नहीं, औरों के लिए किया। राम के लिए हमेशास्वहितसे ज्यादा, परहित, समाजहित और राज्यहित मायने रखता था। शायद इसीलिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जब भारत को ब्रिटिश हुकुमत से आजादी दिलाने की लड़ाई लड़ रहे थे तो रामराज्य की संकल्पना को साकार करना चाहते थे। राम का आदर्श गांधी को संबल प्रदान करने का काम करता रहा था। ठीक उसी तरह जैसे आज पीएम मोदी रामराज्य की कल्पना कर रहे हैं l स्वच्छता की बात हो या फिर  सबका विकास और प्रजा हित सबसे ऊपर रखने की बात हो मोदी जी उसी तरह कर रहे हैं जैसे सतयुग में राजा राम जी के शासन में होता था तभी तो आज एक ट्वीट में आम आदमी को खाना मिल जाता है। राजा का दरबार आम लोगों के लिये वैसे ही खुला है जैसे भगवान राम का दरबार आम लोगों के लिये खुला था।

रामायण में लिखी ये चौपाई पुनि पुनि कितने हो सुने सुनाये, हिये की प्यास बुझत ना बुझाये। सोलह आने सच है राम रस का पान कितनी बार भी क्यों किया जाये मन नही भरता है। ऐसे में अगर रामायण फिर से छोटे पर्दे पर दिखाया जाये तो फिर कई रिकार्ड बनेंगे इसमे कोई शक नही है।