राजनाथ सिंह ने मनाली लेह मार्ग पर दारचा में बना रिनशेन ब्रिज का उद्घाटन किया

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Rajnath Singh inaugurated Rinshen Bridge

पाकिस्तान ने फायरिंग की आड़ में आतंकियों के घुसपैठ करवाने की कोशिश तब की है जब सोमवार को लद्दाख में सामरिक रूप से महत्वपूर्ण एक पुल का उद्घाटन करने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज लद्दाख पहुचे।

राजनाथ सिंह ने लद्दाख में कर्नल शेवांग रिनशेन पुल का उद्घाटन किया। यह ब्रिज देश को दुनिया के सबसे ऊंचे एयरबेस दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) से जोड़ेगा। यह पुल लद्दाख में दुरबुक और दौलत बेग ओल्डी के बीच बना है। इस मौके पर राजनाथ सिंह के साथ आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत भी मौजूद थे। राजनाथ सिंह ने इस मौके पर कहा कि भारत का चीन के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध हैं। सीमा के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच कुछ वैचारिक मतभेद हैं, लेकिन इस मुद्दे को बड़ी परिपक्वता और जिम्मेदारी के साथ संभाला गया है।

इस पुल का नाम कर्नल शेवांग रिनशेन के नाम पर रखा गया है, शेवांग रिनशेन लद्दाख से भारतीय सेना के अफसर थे। रिनशेन ने पाकिस्तान के खिलाफ 1948, 1971 और चीन के खिलाफ 1962 की जंग लड़ी थी। उनके अदम्य साहस और वीरता के लिए उन्हें 1952 में महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

सेना की तरफ से हाल ही में कर्नल शेवांग रिनशेन के घर को हेरिटेज अबोड बनाया गया है। इसे एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है। फायर एंड फ्यूरी के जीओसी हरिंदर सिंह इस पर्यटन स्थल पर भी पहुंचे। रिनशेन को दो बार वीर चक्र और एक बार सेना मेडल मिल चुका है। लद्दाख में वह कई युद्धों का हिस्सा रहे हैं।

सामरिक रूप से काफी अहम है पुल

Chewang Rinchen Bridge (@DDNewsLive/Twitter)

इस पुल का निर्माण लद्दाख क्षेत्र में 14,650 फीट की ऊंचाई पर किया गया है। इस पुल का निर्माण सामरिक रूप से महत्वपूर्ण दुरबुक श्योक दौलत बेग ओल्डी सड़क पर किया गया है। यह चीन के साथ लगने वाली लाइन ऑफ़ एक्चुअल कण्ट्रोल से 40 किलोमीटर पूर्व में स्थित है।इस पुल की चौड़ाई 4.5 मीटर है, यह पुल 70 टन श्रेणी के वाहनों का भार उठाने में सक्षम है। इससे श्योक नदी के दूसरी ओर के क्षेत्र में विकास को गति मिलेगी तथा यात्रा के समय में भी कमी आएगी। इस ब्रिज के शुरू होने के बाद 14 घंटे की यात्रा सिर्फ 6 घंटे में पूरी होगी। साथ ही चीन सीमा तक पहुचने में काफी कम वक़्त लगेगा।

इस पुल का निर्माण बॉर्डर रोड्स संगठन (BRO) द्वारा किया गया है। इस पुल का निर्माण 15 महीने मंं किया गया, इसमें 6900 क्यूबिक मीटर कंक्रीट तथा 1984 मीट्रिक टन स्टील का उपयोग किया गया।

 


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