गाँधी परिवार का किला ढेर, स्मृति ईरानी 55 हज़ार से ज्यादा मतों से विजयी

2019 का लोकसभा चुनाव कई मायनों में अप्रत्याशित रहा| देश की जनता ने, परिवारवाद और वंशवाद की राजनीति को नकारते हुए विकास की राजनीति का साथ दिया| देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के कर्ता-धर्ता गाँधी परिवार के किले अमेठी में भी कांग्रेस सुप्रीमो राहुल गाँधी को करारी हार का सामना करना पड़ा| राहुल गाँधी भाजपा के स्मृति ईरानी से करीब 55,120 मतों से हार गए|

आशा के अनुकूल राहुल गाँधी को अमेठी में स्मृति ईरानी से कड़ी टक्कर मिल रही थी| 23 मई को मतगणना की शुरुआत के बाद से ही स्मृति ईरानी राहुल गाँधी से बढ़त पर थी| 2004 से राहुल गाँधी इस सीट से सांसद थे, पिछले लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने बीजेपी की स्मृति ईरानी को इसी सीट से हराया था|ईरानी को 1,07,903 मतों से हार का सामना करना पड़ा था| लेकिन पिछले चुनाव में भी ईरानी बीजेपी के मतों का प्रतिशत 5.81 से 34.38 तक करने में कामयाब रही थी, और उन्हें तीन लाख से ज्यादा वोट मिले थे|

वहीं इस बार ईरानी को कुल 4,68,514 (49.71%) वोट मिले, जब कि राहुल गाँधी को 4,13,394 (43.86%) वोट मिले|

चुनाव के दौरान भी शायद कांग्रेस और राहुल गाँधी को अपने फिसलते जनाधार का अंदाजा था| शायद इसीलिए राहुल गाँधी ने वायनाड सीट से भी परचा दाखिल किया था| अमेठी सीट पर चुनाव प्रचार को भी राहुल गाँधी ने ज्यादा तवज्जो नहीं दी और सिर्फ परचा दाखिल करने के दौरान हुए रोड शो के अलावा उन्होंने कोई उल्लेखनीय जनसभा नहीं की| उनका भार उनकी बहन प्रियंका वाड्रा ने उठाया हुआ था|

इसके उलट स्मृति ईरानी ने अपने लोकसभा क्षेत्र को खासा महत्व दिया और क्षेत्र में घूम-घूम कर प्रचार किया| एक ऐसी सीट जो कांग्रेस की बपौती समझी जाती थी, जो सीट पिछले ३ दशक से भी (१९९८ को छोड़कर) ज्यादा से कांग्रेस के पास थी, वो सीट कांग्रेस के हाथ से निकल गयी| ये देश में लोकतंत्र के एक नए अध्याय का आरम्भ है|