भारत ने बनाया 1200 किलोमीटर प्रति घंटा दौड़ने वाली बुलेट ट्रेन का प्रोटोटाइप

Fastest Bullet Train

रफ़्तार हमारी जिंदगी की प्राथमिकता बन गयी है| मुंबई – अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की घोषणा के बाद, बीते कुछ सालों में हमारे देश में तेज रफ़्तार ट्रेनों की चर्चा खूब हो रही है| इस दिशा में अब बहुत जल्द ही स्वदेशी तकनीक पर आधारित बुलेट ट्रेन चलने लगे तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए| हमारे देश के वैज्ञानिक, दुनिया की सबसे तेज रफ़्तार वाली मैग्लेव ट्रेन की तकनीक पर काम करने में जुटे हुए हैं|

इंदौर स्थित राजा रमन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केंद्र (IRCTC) लेज़र तकनीक और परमाणु उर्जा से जुड़े क्षेत्र में अनुसंधान के लिए प्रसिद्ध है| परन्तु यहाँ के वैज्ञानिक चुम्बकीय शक्ति और संबंधित तकनीक पर भी शोध करते है| हाल ही में इस केंद्र के वैज्ञानिकों ने सबसे तेज़ रफ़्तार वाली मैग्लेव ट्रेन के मॉडल का सफल परीक्षण किया है|

मैग्लेव ट्रेन की कुछ खास बातें

मैग्लेव ट्रेन को दुनिया की सबसे तेज़ रफ़्तार ट्रेन माना जाता है जिसकी रफ़्तार 600 किलोमीटर प्रति घंटा के आस-पास होती है| दरअसल यह ट्रेन और ट्रेनों से बिलकुल अलग होती है और मैग्नेटिक फील्ड (यानि कि चुम्बकीय प्रणाली) की मदद से चलती है| वर्तमान में ऐसी ट्रेन और ऐसी तकनीक जापान, चीन और दक्षिण कोरिया के पास है| इस ट्रेन की सबसे रोचक बात है कि यह पटरी से लगभग 2 सेंटीमीटर ऊपर चलती है, या फिर कहें तो पटरी से 2 सेंटीमीटर ऊपर हवा में उडती है|

भारतीय वैज्ञानिक तैयार कर रहे मैग्लेव का प्रोटोटाइप

Team of Maglev Scientists

राजा रमन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केंद्र में कार्यरत वैज्ञानिकों की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक करीब 50 वैज्ञानिक और तकनीक विशेषज्ञों की टीम ने मिलकर मैग्लेव ट्रेन का प्रोटोटाइप लगभग 10 साल की अवधी में तैयार किया है|

प्रोटोटाइप के बारे में जानकारी देते हुए वैज्ञानिक शिंदे ने बताया कि, “पूरी तरह से इकोफ्रेंडली इस ट्रेन में टक्कर और दुर्घटनाओ की संभावना बहुत ही कम है| इस ट्रेन की रफ़्तार को 600 से 1200 किलोमीटर प्रति घंटा बढ़ाने के लिए शोध हो रहा है| मैग्लेव ट्रेन का ये प्रोटोटाइप पूर्ण रूप से स्वदेशी तकनीकों से तैयार किया गया है, जिसका सफल परिक्षण भी किया जा चूका है|

इस ट्रेन में इंधन के तौर पर नाइट्रोजन और उर्जा के लिए सौर्य उर्जा का प्रयोग किया जाता है| इसका मतलब आने वाले समय में जब पेट्रोल और डीजल की कमी हो जाएगी तब भी यह ट्रेन काफी कारगर साबित होगी|

वैज्ञानिकों ने तो मैग्लेव ट्रेन की तकनीक तैयार कर ली है अब देखना यह है कि कब तक ये तकनीक धरातल पर टेस्टिंग के लिए तैयार हो पाती है और सरकार इस तकनीक का इस्तेमाल कब और कैसे करती है| मैग्लेव ट्रेन का देश में चलना देश को तकनीकी क्षेत्रों में और भी मजबूती देगा और देश की विकास को गति मिलेगी|