कैसे बदली लोकसभा चुनाव में अपने प्रत्याशी को चुनने की प्रक्रिया

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इस बार चुनाव आयोग लोकसभा चुनाव में बहुत सारे बदलाव करने जा रही है|लगातार ईवीएम पर उठते सवाल को देखते हुए चुनाव आयोग ने इस चुनाव पैट का इस्तेमाल करेगी| लोकसभा चुनाव 2019 में ईवीएम के प्रति विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग इस बार वीवी पैट का इतेमाल करेगी| चुनाव आयोग ने यह फैसला बीते कुछ सालों में ईवीएम को लेकर खडे हुए सवालों को देखते हुए लिया है| उल्लेखनीय है की चुनाव में मतदान के लिए बीते दो दशको से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम का इस्तेमाल किया जा रहा है| इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का मतदान के लिए इस्तेमाल सबसे पहले 1999 में हुए चुनावों में किया गया था| इससे पूर्व, हमारे देश में मतदान के लिए बैलेट पेपर और बैलेट बॉक्स का इस्तेमाल किया जाता था| जिसके लिए काफ़ी खर्च हुआ करता था और चुनाव आयोग को परेशानी भी उठानी पड़ती थी| आज हम आपको बताएँगे कि 1951 में हुए देश के पहले लोकसभा चुनाव के लिए किस तरह मतदान कराए गए और मतदान प्रक्रिया चुनाव दर चुनाव किस तरह बदलती चली गयी|

हर प्रत्‍याशी के लिए होता था अलग बैलेट बॉक्‍स

1951 में हुए देश के पहले लोकसभा चुनाव में देश की 80 फीसदी से ज्यादा आबादी बिना पढ़ी लिखी थी| ऐसे में चुनाव आयोग के लिए चुनाव  एक बेहद कड़ी परीक्षा थी| चुनाव आयोग ने पहले चुनाव के लिए बैलेट बॉक्स के इस्तेमाल का फैसला किया| फैसला के लिए चुनाव लड़ने वाले हर प्रत्याशी का अलग कार्ड होता था| जिसमें उसका नाम और चुनाव चिन्ह छपा होता है| वहीं प्रत्येक प्रत्याशी के लिए अलग बैलेट बॉक्स रखा जाता था| मतदाता अपने पसंदीदी प्रत्याशी के कार्ड को उसके बैलट बॉक्स में डालकर अपने मताधिकार का प्रयोग करते थे|

प्रत्‍याशियों के लिए एक बैलेट पेपर का इस्‍तेमाल

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1951 में शुरू हुई मतदान प्रक्रिया के तहत 1957 के भी लोकसभा चुनाव कराए गए| चुनाव आयोग ने 1962 के तीसरे लोकसभा चुनाव में पहली बार इस प्रक्रिया को बदला गया था| अब सभी प्रत्याशियों के लिए एक ही बैलेट बॉक्स और एक बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया गया| बैलेट पेपर में सभी प्रत्याशियों के नाम और चुनाव चिन्ह दर्ज होता था| मतदाता अपने पसंद के प्रत्याशी के नाम पर मोहर लगाकर बैलेट
पेपर को बैलेट बॉक्स में डालते थे| 1962 के लोकसभा चुनाव से पहली बार चुनाव आयोग ने सभी प्रत्याशियों के लिए एक ही बैलेट बॉक्स का इस्तेमाल किया था|

कैसे तैयार हुए थे मतदान के लिए बैलेट बॉक्‍स

आपको बता दें कि 1951 लोकसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग के सामने बड़ी चुनौती थी कि मतदान के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद बैलेट बॉक्स का निर्माण कराया जाए| उस दौर में चुनाव आयोग ने बैलेट बॉक्स बनाने की जिम्मेदारी गोदरेज नमक कंपनी को सौपी थी| चुनाव आयोग ने गोदरेज को महज 4 महीनों में 20 लाख बैलेट बॉक्स तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी थी| गोदरेज ने जुलाई 1951 में मुंबई के बिखरोल स्थिति कारखाने में मतपेटियों का निर्माण शुरू किया| गोदरेज ने 8200 टन स्टील का इस्तेमाल कर चार महीनों में 20 लाख बैलेट बॉक्स बनाने का लक्ष्‍य पूरा कर लिया|

1999 में भारत को ईवीएम मिला जिसके बाद आज तक वही इस्तेमाल होता आ रहा है| ईवीएम आने के बाद चुनाव आयोग को चुनाव लेने में काफ़ी आसानी होती है, साथ ही किसी भी प्रकार की धांधली होने के आसार भी नही होते हैं| इस साल चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव में ईवीएम में बहुत सारे बदलाव करके चुनाव में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पर रोक लगाने की हर संभव कोशिश कर रही है|