प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की असम यात्रा, खुशी में जगमगाया कोकराझार

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बोडो समझौते पर हस्ताक्षर होने के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में भाग लेने के लिए कोकराझार, असम जायेंगे। बोडो समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद पीएम मोदी का यह पहला असम दौरा है। पीएम मोदी के दौरे से पहले और बोडो शांति समझौते के स्वागत में कोकराझार जिले में लोगों ने लाखों मिट्टी के दिए जलाकर अपनी खुशी जाहिर की। गुरुवार को कोकराझार दीयों की रोशनी से जगमगा गया। साथ ही पीएम के स्वागत में जगह-जगह बड़े बैनर लगाए गए हैं।

इससे पहले पीएम मोदी ने अपने यात्रा को लकर चल रही तैयारी के लिए कोकराझार के लोगो का पीएम मोदी ने शुक्रिया किया और पीएम ने गुरुवार को ट्वीट करते हुए बताया, ‘मैं असम में दौरे को लेकर उत्सुक हूं। मैं एक जनसभा को संबोधित करने के लिए कोकराझार में रहूंगा। हम बोडो समझौते पर सफलतापूर्वक हस्ताक्षर किए जाने का जश्न मनाएंगे जिससे दशकों की समस्या का अंत होगा। यह शांति और प्रगति के नये युग की शुरूआत का प्रतीक होगा।’

प्रधानमंत्री ने हाल के एक ट्वीट में हस्ताक्षर वाले दिन को भारत के लिए बहुत महत्वसपूर्ण दिवस कहा था। ट्वीट में आगे कहा गया था कि यह समझौता बोडो लोगों के जीवन में बदलाव लाएगा और शांति, सदभावना और मिलजुलकर रहने के एक नई सुबह की शुरूआत होगी।

पूर्वोत्तर के विकास के लिए प्रतिबद्ध केंद्र सरकार ने नए साल में पूर्वोत्तर क्षेत्र को दो अहम तोहफे दिए हैं। पहले ब्रू समझौता और फिर बोडो समझौता। दोनों ही समझौते पूर्वोत्तर में शांति के लिए बेहद अहम हैं। इन दोनों अहम समझौते के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्वोत्तर के दौरे पर पहुंच रहे हैं।

आयोजित समारोह में स्थानीय समुदाय असम राज्य की विविधता पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुतियां देंगे। प्रधानमंत्री ऐतिहासिक बोडो समझौते के बारे में वहां उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करेंगे।

कोकराझार में प्रधानमंत्री के आने से वहां के युवाओं में खुशी का माहौल देखा जा रहा है। स्थानीय युवाओं ने पीएम तक स्वागत संदेश पहुंचाने के लिये बाइक रैली का भी आयोजन किया।

गौरतलब है कि 27 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में बोडो समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते के दो दिन बाद ही एनडीएफबी के विभिन्न गुटों के 1615 कैडरों ने आत्मसमर्पण किया और मुख्यिधारा में शामिल हो गए। समझौते के तहत विशेष विकास पैकेज से बोडो क्षेत्रों के विकास के लिए 1500 करोड़ रुपये की विशिष्ट परियोजनाएं शुरू की जायेंगी। असम के स्थानीय लोग भी इस समझौते से काफी खुश हैं।

‘बोडो शांति समझौता असम के विकास में मदद करेगा’

असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा है कि बोडो शांति समझौता असम के विकास की दिशा में मददगार साबित होगा, मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का इस समझौते के लिए राज्य के लोगों की ओर से आभार जताया।

क्या है बोडो समझौता

असम के बोडो समझौते को कई उग्रवादी संगठनों को एकसाथ लाकर उन्हें मुख्यधारा में लाने वाला सबसे बड़ा समझौता कहा जा रहा है। इसमें बोडो जनजाति से जुड़े कई संगठन शामिल हैं। इस समझौते को बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन या बीटीआर अकॉर्ड कहा जा रहा है। ये मौजूदा बोडोलैंड टेरिटोरियल एरियाज़ डिस्ट्रीक्ट (BTAD) की जगह लेगा।

बोडो समझौता इसलिए खास है क्योंकि इसमें बोडो जनजाति से जुड़े तकरीबन सभी उग्रवादी संगठनों ने केंद्र सरकार के साथ समझौता किया है। इसमें बोडो उग्रवादी संगठनों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर इलाके के विकास में भागीदार बनने का वचन दिया है। उग्रवादी संगठनों ने अलग बोडोलैंड की मांग छोड़ दी है। बदले में केंद्र सरकार ने वादा किया है कि वो बोडो क्षेत्र को ज्यादा स्वायत्तता प्रदान करेगी और उसके विकास में केंद्र सरकार का भरपूर योगदान होगा। बोडो जनजाति की सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने में केंद्र सरकार पहल करेगी और इस बात पर नजर रखेगी कि इसे किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।

पूर्वोत्तर में शांति के लिए बेहद जरुरी ये अहम समझौता प्रधानमंत्री के सबका साथ, सबका विकास विजन और पूर्वोत्तर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्धता के अनुरूप है। इससे 5 दशक पुरानी बोडो समस्या् का समाधान हुआ है। गणतंत्र दिवस की शाम ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने हिंसा के मार्ग पर चलने वाले सभी लोगों को आत्मसमर्पण करने और मुख्यधारा में शामिल होने का आह्वान किया था।

पूर्वोत्तर में शांति और विकास के एजेंडे पर नरेंद्र मोदी सरकार काम कर रही है और पीएम का दौरा भी इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।

 


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