किसानों को आत्मनिर्भर करने के बाद कामगारों को सशक्त बनाने की मोदी सरकार की तैयारी

कृषि बिल 2020 को लाने के बाद अब मोदी सरकार देश के 50 करोड़ संगठित और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों और कामकाजी लोगों के लिए बड़ा फैसला लिया है। मोदी सरकार ने 44 श्रम कानूनों में बड़ा बदलाव करते हुए सिर्फ 4 श्रम कोड बनाए हैं। इसके साथ ही सरकार ने 12 कानूनों को रद्द करते हुए पुराने 44 में से 3 कानूनों को नए श्रम कोड में शामिल किया है। यानी 29 की बजाय अब सिर्फ 4 श्रम कानून लागू होंगे। चलिये आप को बताते है इस कानून के बारे में …

वेतन सुरक्षा

नये कानून में राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम वेतन तय किया जाएगा। मोदी सरकार एक परिषद का गठन करेगी जो प्रतिवर्ष न्यूनतम सैलरी का आकलन करेगी। वेतन का निर्धारण भौगोलिक स्थिति और स्किल के आधार पर होगा। 15 हजार रुपये न्यूनतम वेतन फिक्स करने की की तैयारी है,  कंपनियों को वेतन समय पर देना होगा, महीने की 7-10 तारीख तक कर्मचारी को वेतन हर हाल में देना होगा। पुरुष और महिला को समान वेतन मिलेगा।

व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य कोड

कंपनी अपने वर्करों के लिये व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ सेवा कैसी दे इसके बारे में सरकार ने इस बिल में पूरा पूरा जोर दिया है। मसलन काम करने के लिए सुरक्षित वातावरण हो, कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर ध्यान रखने के लिये कदम उठाने होगे। कंपनियों को कैंटीन और क्रेच सुविधा मुहैया कराना अनिवार्य होगा। हर मजदूर, कर्मचारी को नियुक्त पत्र देना अनिवार्य होगा, अगर किसी मजदूर या कर्मचारी की हादसे में मौत हो जाती है तो मुआवजे के अतिरिक्त जुर्माने की 50% तक की राशि कंपनी कर्मचारी को भी देगी। प्रवासी मजदूर को हर साल एक बार घर जाने के लिए प्रवासी भत्ता कंपनी देगी। प्रवासी मजदूर जहां काम करेगा वहीं राशन मिलेगा। प्रवासी श्रमिकों का एक नेशनल डाटा बेस बनाया जाएगा।  240 दिनों की बजाय अब 180 दिन काम करने पर कर्मचारी Earn Leave का हकदार होगा। महिलाओं को सभी क्षेत्रों में काम करने की इजाजत होगी। अब मीडिया, इलैक्ट्रॉनिक मीडिया, डिजिटल मीडिया में काम करने वाले पत्रकारों को वर्किंग जर्नलिस्ट की श्रेणी में रखा गया है।

औद्योगिक संबंध कोड

ट्रेड यूनियन को केन्द्र, राज्य एवं संस्थान स्तर पर कानूनी मान्यता मिलेगी। शिकायत निवारण कमेटी में सदस्यों की संख्या 6 से बढ़ाकर 10 की जाएगी। 5 सदस्य ट्रेड यूनियन और 5 सदस्य संस्थान के होंगे। वर्कर की परिभाषा वेतन के आधार पर तय की जाएगी। 18,000 रुपये तक वेतन पाने वाले कर्मचारी वर्कर की श्रेणी में आएंगे। लेबर ट्रिब्यूनल में अब तक सिर्फ एक जज होते हैं, अब एक और प्रशासनिक सदस्य बनाया जाएगा, ताकि समस्याओं का समाधान जल्द हो सके। इतना ही नही अगर किसी कंपनी ने कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया तो उसे कर्मचारी को 15 दिन का वेतन  देना होगा और कंपनी इस फंड को 45 दिन के अंदर कर्मचारी को हर हाल में देगी।

सामाजिक सुरक्षा पर कोड

संगठित और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों और कामकाजी लोगों को सामाजिक सुरक्षा के लिए भी सरकार ने नये नियम में कई बदलाव किये है जो इस प्रकार है।देश के 740 जिलों में ESIC की सुविधा होगी, अभी ये सुविधा फिलहाल 566 जिलों में ही है।

 

खतरनाक क्षेत्र में काम कर रहे संस्थानों को अनिवार्य रूप से ESIC से जोड़ा जाएगा, चाहे 1 ही श्रमिक काम क्यों ना करता हो।  पहली बार 40 करोड़ असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों को ESIC से जोड़ा जाएगा। बागान श्रमिक भी ESI के दायरे में आएंगे। दस कम श्रमिक वाले संस्थानों को भी स्वेच्छा से ESI का सदस्य बनने का विकल्प होगा।

 

बीस से अधिक श्रमिकों वाले संस्थान EPFO की कवरेज में आएंगे।कांट्रेक्ट पर काम करने वाला कर्मचारी को भी ग्रेच्यूटी का लाभ मिलेगा, इसके लिए न्यूनतम कार्यकाल की बाध्यता नहीं होगी।

 

असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का राष्ट्रीय डाटा बेस बनाया जाएगा, जहां पर सेल्फ रजिस्ट्रेशन करना होगा।

70 साल से संगठित और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों और कामकाजी लोगों के बारे में बाते तो बहुत लोगो ने की है लेकिन किसी ने ठोस कदम नही उठाया है लेकिन जैसे मोदी सरकार हर सेक्टर में नये बदलाव करके नये भारत का निर्भाण करने में लगी है ऐसे ही इन नियमो के जरिये देश के कामगारों के हाथ मजबूत करने की कवायद में जुट चुकी है। लेकिन ये भी तय है कि कुछ लोगो को ये बिलकुल नई भायेगा, क्योकि वो तो कसम खाकर बैठे है कि देश में बदलाव को तो वो सही बोल ही नही सकते। लेकिन आप इनके बहकावे में मत आना क्योकि सरकार की कोशिश सिर्फ आपका जीवन नही बदलना है, बल्कि उसे मजबूत भी करना है।