पुरानी तस्वीर दिखाकर हिंदू परिवारों की परंपरा को बदनाम करने वाली सियासत  

इस बात को कोई इंकार नही सकता है कि कोरोना की दूसरी लहर, पहली लहर से ज्यादा घातक साबित हुई है और इस बार मरने वालों की संख्या भी ज्यादा रही है। लेकिन ये भी सच है कि कुछ लोग हुई मौतो पर सियासत कर रहे है तो कुछ दरबारी मीडिया जनता के बीच भ्रम पैदा करने में लगे है। खासकर गंगा किनारे दफनाये हुए शवो को लेकर ऐसी हवा उड़ाई जा रही है जैसे यह सारी मौतें कोरोना के कारण हुआ हो। 2013 में इस तरह की तस्वीर देखी जा सकती थी लेकिन इससे उस वक्त कुछ लोगो की सियासी रोटी नहीं सिक रही थी इस लिये वो चुप थे।

शवों पर ओछी सियासत

गंगा किनारे दफनाए गए शवों को हालिया करार देते हुए सोशल मीडिया पर हो-हल्ला मचाने वालों को यह पुरानी तस्वीर गौर से देखनी चाहिए। यह तस्वीर 18 मार्च, 2018 की है, जब कुंभ 2019 के क्रम में तीर्थराज प्रयाग के शृंगवेरपुर का कायाकल्प हो रहा था। उश वक्त कुछ लोकल मीडिया ने ये तस्वीर उतारी थी और उस समय न कोरोना जैसी आपदा थी और न शवों को दफन करने की कोई मजबूरी। लेकिन कुछ लोगो ने इन तस्वीरो को जारी करके सोशल मीडिया में भ्रम का ऐसा जाल बुना की जनता सरकार से सवाल करने लगी जबकि जब हकीकत सामने आ गई है तो ये लोग चुप हो गये है। ऐसे में ये बहुत शर्म की बात है जब देश कोरोना को हराने के लिये जंग लड़ रहा है तो कुछ लोग सिर्फ इसमें बाधा पहुंचा रहे है तो अफवाह का मायाजाल भी बुन रहे है।

हिंदू परिवारों में शव को दफनाने की भी है परंपरा

वैसे अधिकतर लोग यही जानते है कि हिन्दू परिवार में शव को जलाया जाता है लेकिन ये पूरा सच नही है क्योकि एक सच ये भी है कि हिंदू परिवारो में शवों को दफनाया भी जाता है  जो कई हिंदू परिवारों में पुरखों से चली आ रही है। एक ऐसी परंपरा जो बहुत पुरानी है, लेकिन गंगा की निर्मलता के लिहाज से उचित नहीं है, पर इसके बाद भी अभी बहुत परिवार ऐसा करते आये है। खासकर उन लोगो को जलाया नही जाता है जिनका जनेऊ नही हुआ होता है। लोगों को या तो गंगा में प्रभावित किया जाता है या फिर शव को दफना दिया जाता है जो सालो से चली आ रही है। फिलहाल इसे बदलने के लिये कई संगठन लोगो को जागरूक भी कर रहे है तो कई लोगों को आर्थिक मदद भी दे रहे है लेकिन इसके बावजूद भी ये प्रथा कम जरूर हुई है पर अभी भी जारी है जिसपर कोरोना काल पर कुछ लोगो ने सियासत का दांव खेला है।

लेकिन जैसे जैसे परत खुल रही है वैसे वैसे सच सामने आ रहा है जो ये बता रहा है कि गंगा के किनारे ये लाश कोरोना से मरने वालो कि नहीं बल्कि परंपरा के चलते दफनाई गई लाशे है।