दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीख तय होते ही राजनीतिक सरगर्मी शुरू

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दिल्ली विधानसभा 2020 की रणभेरी बज चुकी है| चुनाव आयोग ने मतदान और नतीजों की तारिख तय कर दी है और इसके साथ ही दिल्ली में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गयी है| चुनावी वादों, और आरोप-प्रत्यारोप के साथ  सभी पार्टियाँ कमर कस के अपने-अपने तरीके से जनता को लुभाने में लग चुकी है| आइये देखते हैं अब तक क्या क्या हुआ:

विकास के मुद्दे के साथ बीजेपी मैदान में

भारतीय जनता पार्टी लोकसभा चुनाव की तरह ही विकास के मुद्दे को लेकर आगे बढ़ती हुई दिख रही है| दिल्‍ली भाजपा के प्रदेश अध्‍यक्ष मनोज तिवारी ने कहा भाजपा मंगल करने वाली पार्टी के तौर पर ही जानी जाती है। वर्तमान केजरीवाल सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने प्रदूषण का मुद्दा भी उठाया|

पूर्व क्रिकेटर और पूर्वी दिल्‍ली से भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने कहा कि हम लोग दिल्‍ली को और बेहतर जगह बनाने की कोशिश करेंगे, जहां प्रदूषण, पानी की समस्‍या के अलावा बेहतर इंफ्रास्ट्रक्‍चर लोगों के लिए मौजूद होगा। भाजपा के आते ही दिल्‍ली को एक बेहतर सरकार मिलेगी।

वहीँ प्रदेश प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर ने मोदी का नेतृत्‍व और उनकी छवि का हवाला देते हुए भरोसा जाहिर किया कि भारतीय जनता पार्टी ही दिल्ली में सरकार बनाएगी| बीजेपी का मानना है कि केजरीवाल को भले ही जनता पसंद करे, लेकिन उनके विधायकों के प्रति जनता में जबर्दस्त नाराजगी है।

पिछले पाँच साल को भुनाने की तैयारी में आम आदमी पार्टी

अपने लोक लुभावन वादों के लिए मशहूर आम आदमी पार्टी आश्वस्त है की दिल्ली की जनता एक बार फिर उनपर भरोसा दिखाएगी| केजरीवाल ने दिल्ली की जनता से काम के आधार पर वोट देने की अपील की है| वहीँ दिल्‍ली के उपमुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि उनकी पार्टी दिल्ली की जनता की उमीदों पर खरा उतरेगी|

अपने ही जाल में फंसी कांग्रेस

यूँ तो 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव को त्रिकोणीय माना जा रहा है जिसमे मुकाबला सत्ताधारी आप, बीजेपी और कांग्रेस के बीच होने की सम्भावना है| लेकिन कांग्रेस कहीं न कहीं अभी से ही नंबर तीन दिख रही है| देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का जनाधार दिल्ली में नगण्य है| जिसका कारण पार्टी के द्वारा 2013 में की गयी गलती है, जो उसने भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बाहर रखने के लिए आम आदमी पार्टी को समर्थन देकर किया था|

बता दें की पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस दिल्ली से एक भी सीट जीतने में कामयाब नहीं रही थी| कांग्रेस पार्टी के पास शीला दीक्षित के बाद कोई दमदार चेहरा भी उपलब्ध नहीं है। साथ ही किसी भी एक नाम को लेकर एकजुटता का अभाव भी कांग्रेस पार्टी में साफ़ झलकता है।

सीधा मुकाबला आप और बीजेपी में

निष्कर्ष यही है कि इस विधानसभा चुनाव में सीधा मुकाबला आम आदमी पार्टी और बीजेपी में ही दिख रहा है| देखना दिलचस्प होगा कि इस बार दिल्ली की सत्ता का ऊँट किस करवट बैठेगा|


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