रामलीला मैदान में पीएम मोदी ने लिखी जीत की पठकथा: कार्यकर्ताओं में फूंका जीत का मंत्र

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दिल्ली का रामलीला मैदान जो आने वाले कल की पठकथा लिखता रहा है उसने शनिवार को एक बार फिर से एक नई गाथा लिखी। पीएम मोदी ने चुनाव से ठीक पहले अपने कार्यकताओं के सामने जो भाषण दिया। उससे बीजेपी कार्यकताओं का जोश कई गुना बढ़ गया होगा।

पीएम ने जहां मंच से अपने विरोधियों का पूरा पूरा बहीखाता खोल कर रख दिया तो वही उन कामो की भी जानकारी दी जो पिछले 4.5 सालमे किये गये है.इतना ही नही पीएम ने 6 सूत्री चुनावी मंत्र भी अपने कार्यकताओं के कान मे फूंका।

चुनावी एजेंडे को मोदी के निर्णायक नेतृत्व, पांच साल की उपलब्धियों, मतदाताओं से सघन सम्पर्क, संगठन शक्ति के भरपूर उपयोग, विपक्ष के दुष्प्रचार का आक्रामक जवाब और संवेदनशील मुद्दों पर सुविचारित प्रतिक्रिया के इर्द गिर्द रखने को कहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा गया है कि अगले पांच महीने केवल चुनाव के महीने हैं, ऐसे में पार्टी कार्यकर्ता जो बयान दें, कार्यक्रम करें, भाषण दें, उसमें नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव कैसे जीता जाए, इस पर जोर हो। पार्टी ने जोर दिया है कि भाजपा का हर कार्यकर्ता ठान ले कि चुनाव का मुख्य मुद्दा ‘नेतृत्व’ हो तब उन्हें कोई पराजित नहीं कर सकता क्योंकि इस मुद्दे पर विपक्ष टिक नहीं सकता.’ देश का नेतृत्व आगामी चुनाव के बाद किसके हाथों में जाने वाला है, इस विषय को मतदाता के सामने रखें.”इतना ही नही पीएम मोदी के करीब ही चुनाव रहे इसकी भी रणनीति बनाई गई है। क्योकि बीजेपी अच्छी तरह से जानती है कि मोदी के सहारे ही नैय्या पार हो सकती है। और हो भी क्यों न हो क्योकि पीएम मोदी ही भारत की सियासत मे अभी वो किरदार है जो अपने दम खम के चलते फिजाओं को मोड़ सकते है।

शायद इसीलिये उन्होने जो भाषण इस बार दिया उसमें उन मुद्दो पर ज्यादा जोर दिया गया जो बीते सालों मे पूरे किये गये है। वही कम शब्दो मे मोदी ने जनता को ये भी बताने की कोशिश की है कि जब उनपर या उनके नेताओं पर पुलिस या सीबीआई कोई कदम उटाती थी तो आखिर उसे राजनीत से प्ररित क्यों नही माना जाता था जबकि उनकी सरकार के वक्त सीबीआई हो या दूसरी एजेसियां सभी पर विपक्ष आरोप लगाते रहते है। वही घोटालो की बात करते हुए उन्होने साफ किया कि बीजेपी का सीना इस मामले मे 56 इंच से भी ज्यादा बड़ा है 5 साल मे कोई भी मामला न आना इसका एक बड़ा उधारण है। वही गठबंधन मे दुश्मनो का मिलना भी ये बतलाता है कि उन्हे मोदी से कितनी तकलीफ हो रही है और उन्हे खाने को नही मिल रहा है इस लिये वो मिलकर सत्ता को हासिल करना चाहते है।

बरहाल चुनावी शंखनाद हो गया है और सभी जोर आजमाइस मे लग गये है लेकिन जीत का सहरा किसके माथे सजेगा ये तो चुनाव बाद ही पता चलेगा.  


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