कश्मीर को लेकर लालकिले से पीएम का ऐलन जल्द पूरा होने वाला ?

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

मोदी सरकार ने जम्मू–कश्मीर से 10 हजार अर्द्धसैनिक बलों यानी कि 100 कंपनियां को हटाने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है। मंत्रालय ने राज्य में सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करने के बाद यह फैसला लिया है। केंद्र सरकार के इस फैसले को एक बड़े़ संदेश के रूप में देखा जा रहा है। यह माना जा रहा है कि केंद्र सरकार का यह आकलन है कि राज्य में जनजीवन तेजी से सामान्य हो रहा है।

घाटी में जल्द होगी जनता से चुनी सरकार

15 अगस्त को कश्मीर राज्य पर बोलते हुए पीएम मोदी ने साफ कर दिया था कि जिस तरह से घाटी में धारा 370 हटने के बाद स्थिति बन रही है ऐसे में जल्द ही यहां पर भी चुनी हुई सरकार के द्वारा कामकाज हो सके इसके लिये सरकार कदम उठाने की ओर बढ़ रही है। इसकी झलक सरकार के 10 हजार अर्द्धसैनिक बलों को हटाने से लगने लगा है। इतना ही नही राज्य में कानून–व्यवस्था और सुरक्षा की स्थिति पहले की तुलना में ज्यादा मजबूत हुई है और धीरे–धीरे राजनीतिक प्रक्रिया भी बहाल करने की जरूरत है। जी.सी. मुर्मू की जगह राजनीतिक से संबध रखने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा को जम्मू–कश्मीर के उपराज्यपाल का पद सौंपे जाने का मतलब भी यही निकाला जा रहा है। मनोज सिन्हा राज्य में विश्वास बहाली की दिशा में अनेक कदम भी उठा रहे हैं।

  • नागर समाज के लोगों के साथ संवाद कायम करना शुरू कर दिया है।
  • राज्य के विश्वविद्यालयों के उपकुलपतियों के साथ मिलकर वह नई शिक्षा नीति को लागू करने के बारे में विचार–विमर्श कर रहे हैं।
  • केंद्र सरकार की योजनाओं को निचले पायदान पर खड़े़ लोगों तक कैसे पहुंचाया जाए‚ इसके लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दे रहे हैं।
  • स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ बैठकर ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं को कैसे पहुंचाया जाए‚ इसके लिए भी लगातार विचार–विमर्श कर रहे हैं जिससे आने वाले वक्त में चुनाव शांति के साथ और सब के सहयोग से पूरे हो सके।

आतंकी मंसूबे रखने वालों की घाटी में कमर टूटी

धारा 370 हटने के बाद से ही आतंकवादियों पर सेना महाकाल बनकर टूटी हुई है। तभी इस साल जनवरी से अभी तक करीब 236 से ज्यादा आतंकी मारे गये है तो दूसरी तरफ आतंकियों के आका भी ढ़ेर हुए है। सरकार और सेना की सख्ती का ही असर है कि कश्मीर के कई जिला आतंक से पूरी तरह से मुक्त हो चुके है। इतना ही नही पत्थरबाजी की घटना तो अब बीते एक साल से सिर्फ किस्से या कहानियों में ही सुनने को मिले है। यानी कि सरकार ने जिस तरह से एक साल के भीतर विकास का रोडमैप कश्मीर में खीचा है। उसे कस्मीर की आवाम ने पूरी तरह से अपनाया है। तभी तो हजार कोशिशों के बाद भी कश्मीर के हालात पर विस्वविश्व भारत का समर्थन कर रहा है और भारत के साथ खड़ा है।

कुल मिलाकर इसी लिए केंद्र सरकार जम्मू–कश्मीर में जल्द राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करना चाहती है। दरअसल‚ जम्मू–कश्मीर जैसे सीमावर्ती राज्यों को लंबे समय तक प्रशासनिक अधिकारियों के हवाले नहीं किया जा सकता। इसलिए अपेक्षा की जाती है कि राज्य में शीघ्र ही राजनीतिक प्रक्रिया की बहाली की जाएगी, जिसकी शुरूआत कुछ फैसलो से लगने भी  लगा है।


  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •