प्रधानमंत्री जन-धन योजना: महिलाओं के बैंक अकाउंट 2017 में बढ़कर 77 प्रतिशत हो गए

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने कई ऐसी योजनाएं चलाई हैं, जो लोगों का जीवन बदलने में क्रांतिकारी साबित हुई है। इन्हीं योजनाओं में से एक है प्रधानमंत्री जन-धन योजना। इस योजना के तहत प्रधानमंत्री मोदी ने आजादी के इतने वर्षों बाद भी बैंकिंग व्यवस्था से दूर रहने वाले गरीबों, वंचितों, ग्रामीणों को आर्थिक स्वतंत्रता देने का फैसला किया। इस योजना के तहत जीरो बैलेंस पर बैंक में खाता खोला जाता है।

77 प्रतिशत हुए महिलाओं के बैंक अकाउंट

मोदी सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक प्रधानमंत्री जन-धन योजना ने महिलाओं को बैंक से जोड़ने में मदद की है। एक रिपोर्ट के अनुसार 2014 में 43 प्रतिशत महिलाओं के बैंक अकाउंट थे जो 2017 में बढ़कर 77 प्रतिशत हो गए। कंसल्टिंग फर्म माइक्रोसेव कंसल्टिंग ने अपनी रिपोर्ट ‘द रियल स्टोरी ऑफ वूमन्स’ में कहा है कि देश ने बीते 3 सालों (2014-17) में महिलाओं ने भी वित्तीय मामलों में सहभागिता बढ़ाई है। पड़ोसी देश जैसे कि बांग्लादेश और पाकिस्तान, महिलाओं के स्वामित्व में क्रमशः 36 प्रतिशत और 7 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ बहुत पीछे हैं।

2014 में शुरू हुई थी योजना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 27 अगस्त 2014 को शुरू की गई पीएमजेडीवाई का उद्देश्य गरीबों को वित्तीय सेवाएं प्रदान करना था। इनमें गरीबों के लिए बैंक खाते खोलना, उन्हें भुगतान के इलेक्ट्रॉनिक साधन (RuPay कार्ड के माध्यम से) देना और उन्हें क्रेडिट और बीमा का लाभ उठाने की स्थिति में रखना शामिल था।

सिर्फ प्रधानमंत्री जन-धन योजना ही नहीं, मोदी सरकार ने कई ऐसी योजनाएं शुरू की हैं और कदम उठाए हैं, जिनसे देश में आम लोगों की जिंदगी आसान हुई है। एक नजर डालते हैं मोदी सरकार के ऐसे कदमों पर, जो आम भारतीयों का जीवन आसान बनाने में कारगर साबित हो रही है।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुद्रा बैंक योजना 8 अप्रैल 2015 को शुरु की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पढ़े-लिखे नौजवानों को रोजगार प्रदान करना है। मुद्रा योजना से लोग 10 लाख रुपए तक आसानी से लोन ले सकते हैं और अपने कारोबार को बड़ा सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई मुद्रा योजना के कारण बड़े स्तर पर स्वरोजगार को बढ़ावा मिला है। इस योजना ने अल्प समय में ही कई लोगों की जिंदगी बदल दी है। इस योजना के लाभार्थियों में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं, यानि महिलाओं की आर्थिक उन्नति में भी यह योजना क्रांतिकारी साबित हुई है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत जनवरी 2020 तक महिलाओं को 15 करोड़ ऋण दिया गया। केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के अनुसार 4.78 लाख करोड़ रुपये की राशि के 15 करोड़ से अधिक ऋण प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत महिलाओं को दिए गए हैं।

बेकार के कानून खत्म किए

मोदी सरकार ने एक और बहुत बड़ा काम किया है, वह बेकार के कानूनों को खत्म करना। मोदी सरकार ने कुल 1827 ऐसे कानूनों की पहचान की है, जिनका आज के माहौल में कोई मतलब नहीं है। सबसे बड़ी बात है कि केंद्र सरकार 1175 ऐसे कानूनों को खत्म कर चुकी है और बाकी कानूनों को भी खत्म करने की प्रक्रिया चल रही है।

स्टैंडअप इंडिया योजना

मोदी सरकार ने पिछले छह साल के दौरान महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए विभिन्न तरह की योजनाएं पेश की हैं। उनमे से एक स्टैंडअप इंडिया योजना है। स्टैंड अप इंडिया लोन योजना अनुसूचित जाति, पिछड़े वर्ग, जनजातियों और महिला उद्यमियों के लिए भारत सरकार द्वारा की गयी पहल है। ये मूल रूप से देश के निचले वर्गों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए एक लोन योजना है। स्टैंड अप इंडिया योजना अनुसूचित जाति-जनजाति और महिलाओं के बीच उद्यमशीलता और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए सरकार की एक योजना है।

‘स्टैंड अप इंडिया’ योजना के तहत करीब चार साल में 16,712 करोड़ रुपये का ऋण मंजूर किया गया है। स्टैंड अप इंडिया योजना के लाभार्थियों में 81 प्रतिशत संख्या महिलाओं की है।

सुकन्या समृद्धि योजना

यह योजना बेटी, बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का ही विस्तार है जिसे 2 दिसंबर 2014 को लांच गया था। योजना के अंतर्गत 0-10 साल की कन्याओं के खाते डाकघर में खोले जाएंगे। इन खातों में जमा राशि पर 8.1 प्रतिशत की दर से वार्षिक ब्याज दिया जा रहा है। बालिकाओं के सुनहरे और सुरक्षित भविष्य के लिए बनाई गई इस योजना के तहत उन्हें पूरी शिक्षा और 18 साल की होने पर शादी के खर्च की व्यवस्था सुनिश्चित होती है। ये योजना बालिकाओं और उनके माता-पिता को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के लिए लागू की गई है, जिसमें छोटे निवेश पर ज्यादा ब्याज दर की व्यवस्था है। सुकन्या समृद्धि योजना अभिभावकों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है।

स्वच्छ भारत अभियान

स्वच्छ भारत मिशन के तहत 2014 से लेकर अबतक देशभर में 9.2 करोड़ से ज्यादा शौचालय बनवाए गए। दुनिया में अपनी तरह के इस सबसे बड़े अभियान के तहत 50 करोड़ परिवारों को लाभ हुआ और उनके जीवन-स्तर में सुधार आया। इस योजना से माताओं और बहनों का खुले में शौच के लिए जाना बंद हुआ, जिससे सरकार के प्रति लोगों की बेहतर राय बनी।

 


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