ऐम्बुलेंस दादा को पीएम ने गले लगाया जबकि दीदी ने मिलने का समय भी नहीं दिया था

कुछ लोग मोदी जी और देश के दूसरे नेताओं को एक ही तराजू में तौलते हैं लेकिन मोदी जी और दूसरे नेताओं का एक बहुत बड़ा अंतर है जिसे देस की जनता जानती है जिसे बयां किया है बंगाल के  पद्मश्री विजेता करीमुल हक उर्फ ऐम्बुलेंस दादा जिन्होने बताया कि मोदी जी और ममता दीदी में बहुत फर्क है एक गले लगाता है तो दूसरे से मिलने भी नहीं दिया जाता है।
 

जब ममता से मिलने पहुंचे ऐम्बुलेंस दादा

पद्मश्री विजेता करीमुल हक उर्फ ऐम्बुलेंस दादा ने एक किस्सा सुनाते हुए बताया कि एक बार वो ममता दीदी के पास मुलाकात करने गये। मुझे उनसे नहीं मिलने नहीं दिया गया। दीदी के कुछ खास लोगों ने पूछा कि आपको क्या चाहिये तब हमने जवाब दिया कि हमें कुछ नही चाहिये बल्कि मैं ये बताने आया हूं कि कोरोना चल रहा है लेकिन डॉक्टर ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। आपको देखना चाहिए कि डॉक्टर क्यों अस्पताल में नहीं रहते हैं। पता कीजिए कि किससे गलती हो रही है। मुझे वहां जाने नहीं दिया गया जो ये बताता है कि दीदी बंगाल के लोगों के प्रति किस तरह का व्यवहार करती है। इसका जीता जागता प्रमाण करीमुल हक की खुद बताई हुई कहानी है। क्योकि जब वो पद्मश्री विजेता से मिलने में कतराती थी तो फिर आम लोगों को ममता दीदी से मिलने में कितनी दिक्कत आती होगी।

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करीमुल को पीएम मोदी ने गले लगाया

वही दूसरी तरफ बागडोगरा में पीएम मोदी ने पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित करीमुल हक उर्फ ऐम्बुलेंस दादा को गले लगाने की तस्वीर सामने आई थ। जिसके बाद ऐम्बुलेंस दादा ने बताया पीएम मोदी ने उन्हे खुद इस मुलाकात के लिए सम्मान के साथ बुलाया था। वैसे मेरी उनसे पहली मुलाकात जरूर थी लेकिन इससे पहले खत के जरिये कई बार बात चीत हो चुकी थी। लेकिन जब मैं पहली बार उनसे मिला तो लगा ही नहीं कि ये भारत के पीएम है क्योकि उन्होने ऐसा महसूस ही नही होने दिया। इस बीच पीएम मोदी ने सियासत से जुड़े मुद्दे पर कोई बात भी नही की बल्कि बस मेरा हालचाल ही जाना जिससे पता चलता है कि पीएम मोदी आम लोगों के कितने करीब है वैसे ये पहला मौका नही है जब पीएम मोदी ऐसे किसी से मिले हो, इससे पहले भी वो कई ऐसे लोगों को बुलाकर मिल चुके है जिनको वो पहले से जानते है जैसे हरियाणा में एक रैली के दौरान पीएम मोदी ने अपने पुराने खाना बनाने वाले को बुलाकर हालचाल पूछा था। ऐसे ही वो कई कार्यकताओं से भी मुलाकात कर चुके है।

जो ये बताता है कि पीएम मोदी कितने बड़े पद पर काबिज क्यो न हो लेकिन उनके व्यवहार में कभी अभी भी नहीं आई है जो ये बताता है कि वो आज भी अपनी जड़ो से जुड़े हुए है और शायद यही अंतर पीएम मोदी और दूसरे नेताओं में है।