पीएम मोदी का ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा अब ग्लोबल हो गया है

जब जब संकट दुनिया पर आता है तब तब भारत संकटमोचन बनकर खड़ा हो जाता है। कुछ ऐसा ही माहौल आज देखा जा रहा है। जब भारत रूस यूक्रेन जंग के बीच दुनिया का पेट भरने में जुटा है। तो दूसरे तरफ आने वाले दिनो में भारत समूचे विश्व को वेद और विज्ञान के संगम से दुनिया को दवाई देखा। वैसे कोरोना काल में भी भारत ने वैक्सीन और जरूरी दवा देकर करोड़ लोगों को बचाया था।

 

WHO ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन का हुआ शिलान्यास

गुजरात के जामनगर के इलाके में WHO ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन का शिलान्यास हो गया है। इसके शुरू होने के बाद समूचे दुनिया को भारत दवाई का सप्लायर होगा। इस केंद्र को केंद्र सरकार और डब्ल्यूएचओ के सहयोग से चलाया जाएगा। बताया जा रहा है कि 250 करोड़ की लागत से 35 एकड़ जमीन पर यह सेंटर बनाया जा रहा है। यह केंद्र पारंपरिक आधार पर आयुर्वेदिक दवाओं का निर्माण करने वाला दुनिया का पहला केंद्र होगा। पारंपरिक चिकित्सा के अनुसंधान से 180 देशों को लाभ होगा। इस केंद्र का काम साल 2024 तक पूरा होने की संभावना है। गौरतलब है कि कोरोना काल के वक्त भी भारत ने दवाई और वैक्सीन दूसरे मुल्को में पहुंचाकर लोगों की जान बचाई थी। जिसे लेकर दुनिया का कोई ऐसा देश नहीं जिसने हिंदुस्तान की तारीफ में कसीदे ना पढ़े हो।

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जंग के इस दौर में लोगों का पेट भरने का काम करता भारत

भारत का खाद्य भंडार दुनिया की जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। जी हां, दुनिया जब स्थिर खाद्य आपूर्ति के लिए विश्वसनीय वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में है, ऐसे में भारत ”वसुधैव कुटुम्बकम” की अपनी धारणा को साकार करते हुए कई खाद्य असुरक्षित देशों के लिए संकट के समय के मित्र के रूप में उभरा है। इस दौरान भारत आज चीनी का निर्यात 34,503 करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंचा है जो कि अपने आप में एक रिकॉर्ड स्तर है। बीते पांच साल में चीनी का निर्यात 12 गुना बढ़ा है। वहीं अगर हम बात करें 2017-18 की तो इस अवधि में 6.2 लाख टन के मुकाबले 2021-22 में 75 लाख टन चीनी निर्यात किया गया है। यह दर्शाता है कि किस तरह से निर्यात में एक बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं अगर गेहूं के निर्यात को लेकर बात हो तो गेहूं का निर्यात एक साल में ढाई गुना से ज्यादा बढ़ा है। 15,890 करोड़ के गेहूं निर्यात के साथ 5 साल में करीब 25 गुना की बढ़ोतरी देखी गई है। चावल के निर्यात में भी 2021-22 में 9.35 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस अवधि में 9.6 अरब डॉलर के चावल का निर्यात किया गया है। चावल के निर्यात को अगर हम दूसरे शब्दों में समझें तो फसल वर्ष 2021-22 में देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 31.60 करोड़ टन पहुंचने का अनुमान है। इसी के साथ पिछले फसल वर्ष में कुल खाद्यान्न उत्पादन 31.07 करोड़ टन रहा था। इस वर्ष गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड 11.13 करोड़ टन रहने का अनुमान जताया गया है। पिछले वर्ष गेहूं का उत्पादन 10.95 करोड़ टन रहा था। 2021-22 के दौरान चावल का कुल उत्पादन 12.79 करोड़ टन रिकॉर्ड अनुमानित है। इस साल तिलहन उत्पादन 3.71 करोड़ टन रह सकता है।

 

जो ये साफ बता रहा है कि भारत किस तरह से विश्व की मदद कर रहा है। फिर स्थिति कोई भी क्यो ना हो और लगता यही है कि भारत सबका साथ सबका विकास का नारा देश से अब ग्लोबल हो गया है