इमरान की चिट्ठी पर पीएम मोदी का जवाब ‘आतंक से मुक्त’ माहौल बनाएं

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इमरान की चिट्ठी पर पीएम मोदी का जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान और विदेश मंत्री एफएम कुरैशी के बधाई संदेश का जवाब दिया है। बधाई पत्रों के जवाब में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस्लामाबाद को आतंक से मुक्त वातावरण बनाने के लिए कहा है। इससे पहले पत्रों में, पाकिस्तानी पीएम और एफएम ने कार्यभार संभालने पर पीएम और ईएएम को बधाई दी थी।

पीएम मोदी ने इमरान को लिखी अपनी चिट्ठी में कहा की आतंक का रास्ता छोड़ने के बाद ही बातचीत संभव है।

हालांकि इमरान खान को भेजे गए पत्र में आतंक मुक्त माहौल का जिक्र है लेकिन दोनों मुल्कों के बीच बातचीत कब शुरू होगी, इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। पत्र में कहा गया कि भारत अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध चाहता है। भारत के लिए प्राथमिकता हमेशा जनता का विकास रहा है। पाकिस्तान लगातार भारत से बातचीत की पेशकश कर रहा है। लेकिन भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद पर कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक बातचीत नहीं हो सकती।

फरवरी में पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हुए आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के संबंधों में कड़वाहट पैदा हो गई थी। इस घटना के बाद दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच पिछले दिनों किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई कॉरपोरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) समिट में पीएम मोदी और इमरान खान की मुलाकात हुई थी, परंन्तु यह मुलाकात सिर्फ अभिवादन मात्र था।

एससीओ सम्मेलन और उससे पहले भी पाकिस्तानी पीएम कई बार भारत से सभी मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत की पेशकश कर चुके हैं।

इमरान खान और पाकिस्तान एफएम ने मंगलवार को अपने संबंधित भारतीय समकक्षों से पत्र प्राप्त किए। भारत ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ कोई बातचीत तब तक नहीं हो सकती जब तक वह अपने क्षेत्र पर आतंकी समूहों पर कार्रवाई नहीं करता है और यह मोदी सरकार की नीति है।

गौरतलब है की 23 मई को अपने चुनाव के बाद इमरान खान ने पीएम मोदी को फोन किया था। बातचीत के दौरान, 30 मई को नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण के लिए इमरान खान को कोई निमंत्रण नहीं दिया गया था।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान लगातार भारत से बातचीत करने की आकांक्षा जता रहे है परंन्तु भारत ने अपना रुख पहले ही दुनिया के सामने साफ़ कर दिया है की आतंकवाद पे लगाम लगाये बिना बातचीत अब संभव नहीं है।

 


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