सम्मान को पीएम मोदी का मान, योग बाबा शिवानंद दंडवत अभिवादन पर पीएम मोदी का विनम्र प्रणाम

राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कार से हस्तियों को सम्मानित करने के दौरान ऐसा कुछ हुआ कि हर कोई भावुक हो गया। वाराणसी के 126 वर्षीय स्वामी शिवानंद नंगे पैर पद्मश्री लेने पहुंचे और सम्मानित होने से पहले वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नमस्कार करने घुटनों के बल बैठ गए। शिवानंद की यह मुद्रा देख पीएम मोदी भी अपनी कुर्सी से उठकर उनके सम्मान में झुक गए। इस दौरान पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा ।

पीएम मोदी भी स्वामी जी के आगे हुए नतमस्तक

राष्ट्रपति भवन में देखा गया दिल को छूने वाला पल

स्वामी शिवानंद को भारतीय जीवन पद्धति और योग के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस दौरान एक ऐसा नजारा देखने को मिला जो कभी भी भूला नही जा सकता है। हुआ कुछ यूं कि जैसे ही योग बाबा स्वामी शिवानंद अपना पद्म पुरस्कार लेने के लिए चले वैसे ही उन्होने पीएम मोदी को दंडवत प्रणाम किया जिसपर पीएम मोदी ने भी उन्हे प्रणाम किया जो सम्मान को मान देने वाली बात थी। इसके बाद राष्ट्रपति कोविंद अपनी कुर्सी से उठ खड़े हुए, उन्होंने आगे बढ़कर शिवानंद बाबा को उठाया और पद्मश्री से सम्मानित किया। राष्ट्रपति कोविंद ने मुस्कुराते हुए बाबा से बातचीत भी की। बता दें कि 126 साल की उम्र के शिवानंद बाबा वाराणसी के कबीर नगर इलाके में रहते हैं और इस उम्र में भी एकदम स्वस्थ हैं।

पीएम मोदी का जताया आभार

कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि शिवानंद बाबा ने कहा कि उनका जन्म बंगाल के श्रीहट्टी जिले में 8 अगस्त 1896 में हुआ था। भूख के कारण उनके माता-पिता चल बसे थे, तब से लेकर बाबा ने केवल आधा पेट भोजन करने का संकल्प लिया, जिसे वे अब तक निभा रहे हैं। कुछ समय बाद वह बंगाल से काशी पहुंचे और यहीं गुरु ओंकारानंद से शिक्षा ली। 1925 में अपने गुरु के आदेश पर वह दुनिया के भ्रमण पर चले गए थे। करीब 34 साल तक देशविदेश को उन्होंने नाप डाला है। पद्म पुरस्कार मिलने पर योग बाबा ने पीएम मोदी को धन्यवाद बोला उनका कहना है कि आज देश में हर नागरिक की सुध रखी जा रही है जो नये भारत के निर्माण की शुरूआत है।

वैसे भी पिछले 8 सालों से उन गुमनाम हीरों की सुध ली जा रही है जिन्होने देश का गौरव समूचे विश्व में बढ़ाया है। लेकिन वो हमेशा पहचान के मुहताज रहे पर अब ऐसा नही है अब उन्हे पहचान भी मिल रही है और पुरस्कार भी।