हर सांसद और हर पार्टी से पीएम मोदी का अनुरोध, ‘’संसद में खुले मन से हो चर्चा’’

पीएम मोदी बजट सत्र  की शुरुआत से पहले संसद परिसर एक बार फिर विपक्ष से अनुरोध करते हुए दिखे।  पीएम मोदी  ने कहा कि इस बजट सत्र में भी हम सांसदों की बातचीत, चर्चा के मुद्दे, खुले मन से की गई चर्चा वैश्विक प्रभाव का एक महत्वपूर्ण अवसर बन सकती है। मैं आशा करता हूं सभी आदरणीय सांसद और दल खुले मन से उत्तम चर्चा कर देश को प्रगति के रास्ते पर ले जाने में मदद करेंगे।

बजट सत्र से पहले पीएम मोदी की सभी दलों से अपील- चुनाव तो चलते रहेंगे, बजट सत्र को फलदायी बनाएं

भारत के लिए बहुत अवसर

पीएम मोदी ने कहा कि मैं सभी आदरणीय सांसदों का बजट सत्र में स्वागत करता हूं। आज की वैश्विक परिस्थिति में भारत के लिए बहुत अवसर मौजूद हैं। यह बजट सत्र विश्व में सिर्फ भारत की आर्थिक प्रगति, भारत में वैक्सीनेशन का अभियान, भारत की अपनी खोजी हुई वैक्सीन.. पूरी दुनिया में एक विश्वास पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि इस बजट सत्र में भी हम सांसदों की बातचीत, चर्चा के मुद्दे खुले मन से की गई चर्चा, वैश्विक प्रभाव का एक महत्वपूर्ण अवसर बन सकती है। मैं आशा करता हूं सभी आदरणीय सांसद और दल खुले मन से उत्तम चर्चा कर देश को प्रगति के रास्ते पर ले जाने में मदद करेंगे।

 

चुनाव के कारण प्रभावित होते हैं सत्र

इतना ही नही उन्होने बोला कि चुनाव के कारण सत्र और चर्चाएं प्रभावित होते हैं, लेकिन मैं सभी आदरणीय सांसदों से प्रार्थना करूंगा कि चुनाव अपनी जगह पर हैं, वह चलते रहेंगे। यह बजट सत्र एक तरह से पूरे सालभर का खाका खींचता है इसलिए अहम होता है। इसलिए हम इस सत्र को जितना फलदायी बनाएंगे, आने वाला वर्ष हमें आर्थिक ऊंचाइयों पर ले जाने में सहायक बनेगा। मुक्त चर्चा हो, मननीय चर्चा हो, मानवीय संवेदनाओं से भरी हुई चर्चा हो, अच्छे मकसद से चर्चा हो, जिससे देश का विकास तेजी से हो सके।

वैसे ये पहली बार नही है जब पीएम मोदी ने विपक्ष के सासंदों से संसद को चलने की अपील करी हो इसके पहले भी वो ऐसा करते आये है। ऐसे में अब विपक्ष का अंदाज क्या होता है ये तो संदन के चलने के बाद ही पता चलेगा लेकिन पीएम मोदी को जो तानाशाह बोलते है वो खुद देख सकते है कि पीएम मोदी लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर किस तरह से विनम्र है कि वो हर बार विपक्ष के सामने अपील करते है कि देश के विकास में वो भी भागीदार बने लेकिन ऐसा देखने क कम ही मिला पर देखते है कि इस बार क्या पीएम का अनुरोध विपक्ष स्वीकारता है या फिर सिर्फ विरोध के लिए विरोध करने की अपनी सियासत पर ही चलता है।