ग्राम प्रधानों को PM मोदी का ख़त – वर्षा जल संरक्षण का सुझाव

letter-to-village-pradhans-on-saving-water

जल संकट एक ऐसी समस्या जिससे न तो भारत बल्कि दुनिया के कई अन्य देश भी जूझ रहे हैं| जितनी तेजी से पानी की जरूरतें और खर्च बढ़ रहा है, उतनी ही भूमि जलस्तर घटता जा रहा है| 15 जून 2019 को PM मोदी के अध्यक्षता में हुए नीति आयोग की बैठक में देश में चल रहे जल संकट के विषय पर भी चर्चा हुई जिसमे जल सरंक्षण को लेकर कई महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर विचार-विमर्श किया गया|

ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते जल संकट को ध्यान में रखते हुए PM मोदी ने ग्राम प्रधानो को निजी तौर पर पत्र लिखते हुए उनसे आने वाले मानसून के दौरान वर्षा जल का संरक्षण करने का अनुरोध किया है| PM मोदी के हस्ताक्षर वाले इन पत्रों को सम्बंधित जिला मजिस्ट्रेटों और कलेक्टरों ने स्वयं अपने हाथों से ग्राम प्रधानों को सौंपा है|

सूत्रों के अनुसार PM मोदी का ये पत्र ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बन गया है| मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी के पास स्थित उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में उनका पत्र 637 ग्राम प्रधानों को दिया गया है| उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के डीएम उमेश मिश्रा ने सुनिश्चित किया कि प्रधानमंत्री का पत्र सभी 601 प्रधानों को सौंप दिया जाए। डीएम ने पहले ही ग्रामीण इलाकों में 775 तालाब खोदने की योजना बनाई है जिसमें 500 पर काम शुरू हो चुका है|

अपनेपन और सदाचार की भावना से भरे हुए हिंदी भाषा में लिखे इस पत्र में PM मोदी ने ग्राम प्रधानों से अनुरोध किया है कि वे इस मानसून वर्षा जल संरक्षण की प्रक्रिया शुरू करने के लिए ग्रामीणों को प्रोत्साहित करने के लिए व्यक्तिगत रूप से प्रयास करें। उन्होंने ग्राम प्रधानों से अनुरोध किया कि ग्राम सभा की बैठक में उनके संदेश को पढ़ा जाये|

अपने पत्र में PM मोदी ने कहा, “प्रिय सरपंचजी, नमस्कार ! मुझे उम्मीद है कि आप और पंचायत के मेरे सभी भाई और बहनें पूरी तरह स्वस्थ होंगे। बारिश का मौसम शुरू होने वाला है। हम ईश्वर के आभारी हैं कि हमें पयार्प्त वषार्जल का आशीर्वाद मिला है। हमें इस आशीर्वाद (जल) के संरक्षण के लिए सभी प्रयास और व्यवस्था करनी चाहिए|”

प्रधानमंत्री ने चेक डैम और तालाबों के निर्माण का सुझाव दिया है, जहाँ पर बारिश के जल का पूर्ण रूप से संरक्षण किया जा सकता है|

हमें बचपन से सिखाया जाता है कि पानी का सही उपयोग करना चाहिए क्योंकि पानी हमारे जीने की प्रक्रिया का एक अहम् हिस्सा है, वो कहते है न, “जल ही जीवन है”| गौरतलब बात ये होगी की PM मोदी के इस पत्र का ग्राम प्रधानों पर क्या असर होता है और जल संकट से बचने के लिए ग्रामीण किस हद तक बारिश का पानी संरक्षण कर पाते हैं| प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ाने की दिशा में पहल की है, लेकिन इस पहल के फायदे के लिए पुरे देश को आगे आना होगा|