पीएम मोदी का फैसला: आरसीईपी से बाहर रहेगा भारत, इन वज़हों से प्रधानमंत्री मोदी ने किया इनकार

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India will stay out of RCEP

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन दिवसीय थाईलैंड यात्रा के समापन के बाद सोमवार देर रात भारत लौट आए हैं। थाईलैंड में पीएम ने तीसरे आरसीईपी शिखर सम्मेलन में भाग लिया और फैसला किया कि वह 16 देशों के आरसीईपी (RCEP) यानी रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप व्यापार समझौते का हिस्सा नहीं बनेगा।

सरकार के इस फैसलें से देश के किसानों, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रमों (एमएसएमई) और डेयरी क्षेत्र को बड़ी मदद मिलेगी। भारत ने घरेलू उद्योगों के हित में सोमवार को एक बड़ा फैसला लिया। भारत RCEP यानी क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी में शामिल नहीं होगा और देश के बाजार सस्ते विदेशी सामान से नहीं भरेंगे। RCEP में शामिल होने पर आयात शुल्क कम होने से स्थानीय उद्योगों पर बुरा असर पड़ने की आशंका थी। RCEP एक ऐसा समझौता है, जिस पर साइन करने से भारत चीन के चंगुल में बुरी तरह फंस सकता था। लेकिन लेकिन मोदी सरकार ने घरेलू उद्योगों के हितों को देखते हुए इस समझौते में शामिल न होने का फैसला लिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने RCEP शिखर सम्मेलन में हिस्सा तो लिया लेकिन वहां भारत के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया। वित्त मंत्रालय की सचिव (पूर्व) विजय ठाकुर सिंह ने कहा, भारत ने आरसीईपी में शामिल नहीं होने के फैसले से अवगत करा दिया है। वार्ता में भारत के मूल हितों से जुड़े कई मुद्दे अनसुलझे रहे, जिसके बाद हमने इससे बाहर होने का फैसला किया। भारत की मांगों को नहीं मानने से 16 देशों के बीच होने वाले इस समझौते से हमें फायदा कम और नुकसान ज्यादा होने की आशंका थी। भारत की चिंताओं पर स्थिति साफ नहीं होने के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश हित में संगठन का हिस्सा नहीं बनने का फैसला लिया।

पीएम मोदी ने कहा, ‘जब मैं आरसीईपी करार को सभी भारतीयों के हितों से जोड़कर देखता हूं, तो मुझे सकारात्मक जवाब नहीं मिलता। ऐसे में न तो गांधीजी का कोई सिद्धांत और न ही मेरी अपनी अंतरात्मा आरसीईपी में शामिल होने की अनुमति देती है।’

क्या है आरसीईपी

RCEP Summit

आरसीईपी समझौता 10 आसियान देशों और 6 अन्य देशों यानी ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, न्यूजीलैंड और दक्षिण कोरिया के बीच एक मुक्त व्यापार समझौता है। इस समझौते में शामिल 16 देश एक-दूसरे को व्यापार में टैक्स कटौती समेत तमाम आर्थिक छूट देंगे। इस समझौते के तहत सदस्य देशों को आयात-निर्यात पर लगने वाला टैक्स या तो भरना ही नहीं पड़ता या फिर बहुत कम भरना पड़ता।

अगर भारत RCEP समझौते पर राजी हो जाता तो प्रस्ताव का क्या पड़ता प्रभाव?

RCEP में शामिल होने के लिए भारत को आसियान देशों, जापान और दक्षिण कोरिया से आने वाली 90 फीसदी वस्तुओं पर से टैरिफ हटाना पड़ता। इसके अलावा, चीन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से आने वाले 74 फीसदी सामान को टैरिफ से मुक्त करना पड़ता। ऐसे में भारतीय बाजार में सस्ते चाइनीज सामान की बाढ़ आ जाती। चीन का अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर चल रहा है जिससे उसे नुकसान उठाना पड़ रहा है। चीन अमेरिका से ट्रेड वॉर से हो रहे नुकसान की भरपाई भारत और अन्य देशों के बाजार में अपना सामान बेचकर करना चाहता है। ऐसे में RCEP समझौते को लेकर चीन सबसे ज्यादा उतावला है। ये कदम भारत के लिए आत्मघाती साबित हो सकता था।

 


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