विपदा के वक्त पीएम मोदी के काम करने की क्षमता और तेज रफ्तार में हो जाती है

पीएम मोदी के काम करने के तरीके पर देश में हमेशा बहस होती रहती है, कुछ लोग पीएम के काम करने के तरीके पर सवाल खड़ा करते हैं तो कुछ पीएम के काम करने के तरीके को लेकर हक्का बक्का हो जाते हैं। क्योंकि वो देश सेवा में रात दिन लगे रहते हैं और देश पर अगर कोई संकट आ जाता है, तो वो और तेजी से काम करने लगते हैं जैसा कि कोरोनाकाल की दूसरी लहर में देखा जा रहा है। देश में मामले बढ़ने से लेकर घटने तक लगातार पीएम मोदी राज्य के सीएम और अधिकारियों के साथ वन टू वन बैठक करते रहे और कोरोना को हराने के लिए रणनीति तैयार करते रहे।

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ज्यादातर सीएम से की वन टू वन बैठक

कोरोना की दूसरी लहर से देशवासियो को बचाने के लिये मोदी ने करीब दो से तीन बार राज्यों के सीएम के साथ बैठकें  तो की साथ ही वन टू वन बैठक भी करते दिखे। खासकर उन सीएम के साथ जहां कोरोना के मामले काफी बढ़ गये थे। ये दौर अभी भी जारी है। तभी कर्नाटक के सीएम यूपी के सीएम और उत्तराखंड के सीएम के साथ साथ तेलंगाना के सीएम और ओडिशा के सीएम के साथ भी बैठक की कुछ सीएम दिल्ली में आकर मिले तो कुछ के साथ लाइट विडियों के जरिये बात की गई इसी क्रम में महाराष्ट्र के सीएम भी मिलने मोदी जी से आये। ऐसा नहीं की पीएम सिर्फ मुख्यमंत्रियों से मिलते रहे। उन्होने राज्य के बड़े अधिकारियों के साथ साथ जिला स्तर के अधिकारी यानी डीएम से भी बात की। करीब समूचे देश में उन्होने 40 से अधिक जिले में सीधे संवाद करके कोरोना से निपटने का प्लान तैयार किया। इन सबके बीच बड़ी बात ये रही ये सब उन्होने खुद किया हर बैठक में शामिल होकर विचार का अदान प्रदान किया जिसकी वजह से कोरोना की रफ्तार धीमी पड़ी।

खुद नहीं सभी की सहमती से लेते हैं फैसला

पीएम मोदी पर एक आरोप ये भी लगता है कि किसी की सुनते नहीं बल्कि खुद के फैसले सब पर थोपते हैं। लेकिन ये बात कोरा बकवास है, इस बात से बोली जा सकती है क्योंकि पीएम ने इस दौरान जितने भी फैसले लिये वो अपने मंत्री परिषद के सभी दिग्गज नेताओं की राय के बाद ही लिये। खुद इस दौरान कई बार उन्होंने रक्षामंत्री, गृहमंत्री और सड़क परिवाहन मंत्री गडकरी के साथ राय लेने के बाद लिये औऱ तो और उन्होने तो उनके विरोधी द्वारा लगातार वैक्सीनेशन देश में केंद्र को करना चाहिये कहने वालो को भी समझाया कि वो आखिर क्यों ऐसा नहीं कर रहे थे लेकिन फिर सबकी सहमती के चलते उन्होने देश में कोरोना टीकाकरण का मेगा अभियान 21 जून से शुरू करने का ऐलान किया है जो ये बताता है कि पीएम मोदी सबका साथ सबका विश्वास सिर्फ बोलते नहीं बल्कि उसे अपने जीवन में लागू भी करते हैं।

वैसे इस दौरान मोदी जी ने कई विदेश के नेताओं के साथ बातें की तो जी7 जैसे संगठन में अपनी बात रखकर ये भी बताया कि भारत विश्व के कल्याण के लिये हमेशा सबसे आगे खड़ा है। लेकिन भाई इससे ये तो साफ हो गया की चीते की चाल और मोदी जी के काम की रफ्तार का कोई जल्दी मुकाबला नहीं कर सकता है।