राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2020 के विजेता बच्चों से कल मुलाकात करेंगे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार, 24 जनवरी को ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ के विजेता बच्चों से बातचीत करेंगे। राष्ट्रंपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कांर 2020 (राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार) का वितरण किया। इसके तहत कुल 22 बच्चोंष को सम्मानित किया गया। सम्मान पाने वाले 22 बच्चों में से 10 लड़कियां और 12 लड़के हैं। मोदी 1730 आदिवासी कलाकारों, एनसीसी कैडेटों, एनएसएस (राष्ट्रीय सेवा योजना) के सदस्यों और उन कलाकारों से भी मुलाकात करेंगे जो गणतंत्र दिवस पर ‘एटहोम’ कार्यक्रम में भाग लेंगे।

‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ विजेताओं में जम्मू कश्मीर, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों के बच्चे शामिल हैं। इन बच्चों में कला एवं संस्कृति, शैक्षिक, समाजसेवा, खेल एवं बहादुरी के क्षेत्र के विजेता शामिल हैं। PMO द्वारा जारी बयान के अनुसार, भारत सरकार बच्चों को राष्ट्र निर्माण के एक सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में मानती है। उनकी आशा, आकांक्षाओं को मान्यता देने के साथ ही उनकी उपलब्धियों को सम्मानित किया जाना चाहिए।

यद्यपि सभी बच्चे बहुमूल्य होते हैं और उनकी उपलब्धियों की सराहना होनी चाहिए, लेकिन कुछ ऐसे बच्चे हैं जिनकी उपलब्धियां कई अन्य के लिए प्रेरक होती है। गौरतलब है की विभिन्न क्षेत्रों में बच्चों की शानदार उपलब्धियों के लिए हर वर्ष सरकार उन्हें पुरस्कार प्रदान करती है।

केरल का वीर बालक मुहसीन

केरल के एक वीर बालक 16 वर्षीय मुहम्मद मुहसीन को मरणोपरांत यह सम्मालन मिला है। पिछले वर्ष के अप्रैल माह में समुद्र में खराब मौसम के कारण खतरे में फंसे अपने तीन मित्रों की जान बचाई थी लेकिन वह अपनी जान नहीं बचा सका और उसकी मौत हो गई।

जलती बस से 42 लोगों को बचाया

15 साल के केरल के आदित्य बीते साल एक मई को 42 अन्य पर्यटकों के साथ नेपाल की यात्रा से लौट रहे थे। भारतीय सीमा से करीब 50 किलोमीटर पहले बस में आग लग गई। आग लगते ही ड्राइवर मौके से फरार हो गया, जबकि 5 बच्चों और कुछ बुजुर्गों समेत तमाम यात्री बदहवास थे। बस के दरवाजे बंद थे। इस बीच आदित्य ने हथौड़े से बस का पिछला शीशा तोड़ दिया। इस दौरान उनके हाथ और पैरों में शीशे से चोटें भी लगीं। आदित्य की यह वीरता ही थी कि बस के डीजल टैंक के फटने से पहले सभी यात्री निकल पाए।

इन्हें भी मिला बहादुरी का पुरस्कार

पुरस्कार पाने वाले अन्य बच्चों में असम के मास्टर श्री कमल कृष्ण दास, छत्तीसगढ़ की कांति पैकरा और वर्णेश्वरी निर्मलकर, कर्नाटक की आरती किरण सेठ और वेंकटेश, केरल के फतह पीके, महाराष्ट्र की जेन सदावर्ते और आकाश मछींद्र खिल्लारे को दिया गया। इसके अलावा मिजोरम के तीन बच्चों और मणिपुर व मेघालय से एक एक बच्चों को वीरता पुरस्कार के लिए चुना गया है।

1957 में हुई थी इसकी शुरुआत

ज्ञात हो कि भारतीय बाल कल्याण परिषद (आईसीसीडब्ल्यू) ने मंगलवार को ही इस सम्मान के लिए 10 लड़कियों और 12 लड़कों के नामों का ऐलान किया था। हर वर्ष गणतंत्र दिवस, 26 जनवरी के पहले वीर बच्चों को सम्मालनित किया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1957 में भारतीय बाल कल्याण परिषद ने की थी। इस सम्मान के तौर पर एक पदक, प्रमाण पत्र और नकद राशि दी जाती है। इस पुरस्कार के तहत सामान्य सम्मान भी दिया जाता है। इसके अंतर्गत प्रत्येक को 20-20 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाती है।