अपने मंत्री परिषद को पीएम मोदी ने पढ़ाया ईमानदारी का पाठ

भारत के सियासी इतिहास में पहली बार राष्ट्रपति भवन में देश के मंत्रिपरिषद की बैठक बुलाई गई। इसकी अध्यक्षता खुद पीएम मोदी ने की। इस बैठक को ‘चिंतन शिविर’ का नाम दिया गया। बैठक में इस बात पर जोर दिया कि सादगी ही जीवन का तरीका है। बैठक में केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया और धर्मेंद्र प्रधान ने एफिशिएंसी और टाइम मैनेजमेंट पर प्रेजेंटेशन दिया गया। जानकारों की माने तो  शासन में सुधार के लिए ऐसे चार और ‘चिंतन शिविर’ आयोजित किए जाएंगे। यानी पीएम मोदी विपक्ष से दो दो हाथ करने के लिये अपने मंत्रियों को भी तैयार कर रहे है।

मनोहर पर्रिकर को किया याद

पीएम मोदी ने अपनी नई टीम को समझाया कि पद में आने के बाद जनता के बीच में जरूर बने रहे इसके लिये अपने इलाके में घूमे और जनता की समस्याओं को समझे और उसे सीधे सुलझाये। लोगों के साथ व्यवहार करना, पत्रों का तुरंत जवाब दें जिससे जनता को लगे कि वो पद में रहकर भी जनता के साथ है। इस बीच पीएम मोदी ने दिवंगत केंद्रीय मंत्री मनोहर पर्रिकर को याद करते हुए उनकी सादगी भरे जीवन की तारीफ की और उससे सबक लेने को कहा गया जिससे जनसेवा का कार्य पूरी तरह से हो सके।

गुजरात की टिफिन मीटिंग्सका हुआ जिक्र

बैठक के दौरान पीएम मोदी  ने अपने गुजरात के दिनों में ‘टिफिन मीटिंग्स’ के बारे में भी बात की, जहां हर कोई बैठकों में अपने-अपने टिफिन लाता था और भोजन के साथ-साथ विचार शेयर किए जाते थे। राष्ट्रपति भवन के सभागार में बैठक करीब पांच घंटे तक चली। बता दें, प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद की नियमित बैठकें करते हैं जहां तमाम मंत्रालय महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रेजेंटेशन देते हैं। बैठकें मंत्रियों को सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं से खुद को अपडेट रखने में भी मदद करती हैं। बैठक में अमृत महोत्सव को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने सभी मंत्रियों से सुझाव मांगे। इस बैठक में 2 प्रेजेंटेशन भी हुए जिसमें आगे काम करने की रणनीति बनाई गई।

पीएम मोदी ने अपने सरकार के मंत्रियों को एक तरह से ये साफ संकेत इस बैठक के जरिये दे दिया है कि सत्ता में रहते हुए भी सरकार के लिये लगातार काम करते रहे और जनता से अपना जुड़ाव भी जरूर रखे जिससे विपक्ष जनता में झूठ या भ्रम का जाल ना बुन पाये और सरकारी योजना का लाभ आम जन तक पहुंचता जाये।

 

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