मन की बात में पीएम मोदी ने कहा: ‘गूगल ने मेरी पढ़ने की आदत बिगाड़ दी है’

पीएम मोदी ने कहा: 'गूगल ने मेरी पढ़ने की आदत बिगाड़ दी है'

महाराष्ट्र में चल रहे सियासी भूचाल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जरिए देश को संबोधित किया।

एनसीसी डे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम के 59वां संस्करण के जरिए चार कैडेट्स से फोन पर मन की बात की। इस दौरान रोहतक के मकड़ौली गांव निवासी अखिल से प्रधानमंत्री ने दो बार बात की। अखिल ने प्रधानमंत्री से पूछा कि आप इतने व्यस्त रहते हो तो क्या आपको किताब पढ़ने या टीवी देखने या फिल्म देखने का मौका मिलता है। इस पर पीएम ने कहा, किताब पढ़ने में मेरी रुचि रहती है। उसमें समय का बंधन नहीं होता है। फिल्म देखने में कभी रुचि नहीं रही। पीएम बोले कि गूगल ने हमारी आदतें बिगाड़ दी हैं, रेफरेंस के लिए शॉर्टकट सीखा दिया। इसके साथ प्रधानमंत्री ने अखिल से उनके एनसीसी कैंप के बारे में पूछा। इस पर अखिल ने कहा कि एनसीसी ने मुझे और ज्यादा जिम्मेदार बनाया है।

जब एक कैडेट ने प्रधानमंत्री से उनसे बचपन के सपने के बारे में पूछा तो पीएम मोदी ने कहा कि वह राजनीति में नहीं आना चाहते थे। हालांकि अब आ गए हैं तो जी-जान से लोगों की सेवा करने में जुटे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद मन की बात के इस 59वें कार्यक्रम में अयोध्या मामले में उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के फैसले को ऐतिहासिक बताने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस मामले में धैर्य और परिपक्वता का परिचय देने के लिए देश की जनता को धन्यवाद दिया। उन्होंने, जिस प्रकार के धैर्य, संयम और परिपक्वता का परिचय दिया है, मैं, उसके लिए मैं देश के लोगो का विशेष आभार प्रकट करना चाहता हूँ। पीएम मोदी ने कहा कि लम्बे समय के बाद कानूनी लड़ाई समाप्त हुई है, और लोगो का न्यायपालिका के प्रति सम्मान और बढ़ा है। सही मायने में ये फैसला हमारी न्यायपालिका के लिए भी मील का पत्थर साबित हुआ है।

प्रधानमंत्री ने देश में बोली जाने वाली सैकड़ों भाषाएं की विलुप्त होने का खतरा पर चिंता भी जताया। प्रधानमंत्री ने कहा, ”हमारी भारत भूमि पर सैकड़ों भाषाएं सदियों से बोली जाती रही हैं। कहीं ये भाषाएं, बोलियां ख़त्म तो नहीं हो जाएंगी। उन्होंने उत्तराखंड के धारचुला की एक कहानी सुनाते हुए कहा की इसको पढ़ने से मुझे काफी संतोष मिला। पिथौरागढ़ के धारचूला में, रंग समुदाय के काफ़ी लोग रहते हैं, इनकी, आपसी बोल-चाल की भाषा रगलो है। ये लोग इस बात को सोचकर अत्यंत दुखी हो जाते थे कि इनकी भाषा बोलने वाले लोग लगातार कम होते जा रहे हैं- फिर क्या था, एक दिन इन सबने अपनी भाषा को बचाने का संकल्प ले लिया।”

हमारी सभ्यता, संस्कृति और भाषाएं पूरे विश्व को, विविधता में, एकता का सन्देश देती हैं।