पीएम मोदी ने एक बार फिर से दिया सवा सौ करोड़ देशवासियों को फ़क्र होने का मौका

विश्व में अगर आज किसी राजनेता का नाम छाया है और समूचा विश्व जिस शख्शियतकी दिवानी है वो नाम है मोदी और जब पीएम मोदी की दिवानगी हम भारत वासी देखते हैं तो सीना चौड़ा हो जाता है और सिर गर्व से ऊँचा. इस क्रम मे भारतवासियो को फक्र करने का एक मौका पीएम मोदी ने और दिया जब संयुक्त राष्ट्र के प्रतिष्ठित और सर्वोच्च पर्यावरण पुरस्कार ‘चैंपियन ऑफ द अर्थ’ से नवाजा गया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतरेस ने अपने हाथों से पीएम मोदी को अवॉर्ड दिया।

पीएम ने इसे ‘देश की सवा सौ करोड़ जनता का सम्मान

इस कार्यक्रम का आयोजन भारत में होना गर्व की बात है। लेकिन इससे बड़ी बात ये है कि पीएम मोदी ने इस सम्मान को भी सवा सौ करोड़ जनता को ही समर्पित किया । पीएम मोदी ने कहा कि यह सम्मान पर्यावरण के संबंध में भारत की सवा सौ करोड़ जनता की प्रतिबद्धता का सम्मान है। भारत की नीत नूतन और पुरातन संस्कृति का सम्मान है, जिसने प्रकृति में परमात्मा को देखा है।यह जंगलों में रह रहे उन आदिवासी भाइयों का सम्मान है, जो जीवन से ज्यादा जंगल से प्यार करते हैं। यह मछुआरों का सम्मान है जो समंदर से इतना ही लेते हैं, जितना अर्थोपार्जन के लिए जरूरी है। वे स्कूल कॉलेज में नहीं गए होंगे, लेकिन वे मछलियों के प्रजनन के समय अपने काम को रोक लेते हैं। यह भारत के उन करोड़ों किसानों का सम्मान है जिनके लिए ऋतुचक्र ही जीवनचक्र है। यह उस महान भारतीय नारी का सम्मान है, जिसके लिए रीयूज और रीसाइकल रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। जो चींटी को भी अन्न देना पुण्य मानती है। यह भारत में प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए समर्पित अनाम भारतीयों का सम्मान है।’ 

 

क्लाइमेट और कैलामिटी का सीधा रिश्ता

पीएम मोदी ने कहा कि यह भारत के लिए दोहरे सम्मान का मौका है क्योंकि कोच्चि एयरपोर्ट को भी सस्टेनेबल एनर्जी के लिए सम्मान मिला है। क्लाइमेट (जलवायु) और कैलामिटी (आपदा) के सीधे रिश्ते का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘मैं पर्यावरण और प्रकृति को लेकर भारतीय दर्शन की बात इसलिए करता हूं क्योंकि क्लाइमेट और कैलामिटी का सीधा रिश्ता है। क्लाइमेट जबतक कल्चर का हिस्सा नहीं होगा, तबतक कैलामिटी से बचना मुश्किल है।

प्रकृति की हम पूजा करते हैं

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘हमने प्रकृति को हमेशा सजीव माना है और सहज जीव भी माना है। प्रकृति के साथ इस भावात्मक रिश्ते के साथ ही पूरे ब्रह्मांड की भलाई की कामना की जाती है।…जब स्वयं ईश्वर को अपना परिचय देना होता है तो वह यह कहते हैं कि मैं ही जलाशय हूं, मैं ही नदी हूं, मैं ही समंदर हूं।’

इसी तरह पीएम ने विश्व को इस मंच से भारत और प्रकृति के बीच मे भावनात्मक रिश्ते को बताया। और इस किस तरह से और बेहतर कर सकते है इसके बार मे भी समझाया। मतलब साफ है कि पीएम मोदी के नेत्तव मे भारत विश्व गुरू बनता जा रहा है। और ये आवर्ड इसकी एक झलक है।