पीएम मोदी ने एक बार फिर आगे आकर अपने विरोधियों को किया परास्त  

एक बार फिर पीएम मोदी ने आगे बढ़कर देशवासियों से सीधा संवाद किया और उन लोगों को सीधा जवाब दिया जो ये बोलते थे कि मोदी जी दूसरी लहर के आने के बाद कुछ क्यों नही बोलते हैं। जब पीएम नरेंद्र मोदी ने चुप्पी तोड़ी तो बहुत संयम के साथ कुछ खुले शब्दों में तो कुछ परोक्ष रूप से कोरोना काल में विपक्ष की राजनीति पर प्रहार किया। किसी भी विपक्षी दल या राज्य का नाम तो नहीं लिया लेकिन देश के सामने स्पष्ट कर दिया कि जिम्मेदारी उठाने का दंभ भरने और उसे पूरा करने में फर्क होता है। जो राज्य लाकडाउन लगाने के निर्णय से लेकर वैक्सीन खरीद तक में स्वतंत्रता की बात कर रहे थे, वे कहीं न कहीं इसे पूरा करने में असमर्थ साबित हुए।

 कम शब्दो में जनता को हकीकत से करवाया रूबरू

जो लोग वैक्सीन पर भ्रम फैलाकर लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल रहे थे, वही वैक्सीनेशन की गति पर भी सवाल उठाने लगे। बात इतनी ही नहीं, राज्य सरकारें तो प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन की मनमानी कीमत पर अंकुश लगाने में भी विफल रहीं। बदले तेवरों के साथ पीएम ने ऐसे लोगों को खूब आईना दिखाया जो आरोप तो खूब लगा रहे थे लेकिन काम के नाम पर कुछ नहीं कर पाये। उन्होंने वैक्सीनेशन की बात शुरू की तो याद दिला दिया कि 2014 से पहले देश में सभी तरह का टीकाकरण महज 60 फीसद पहुंच पाया था। उनके काल में ही इंद्रधनुष कार्यक्रम शुरू हुआ और 2019 तक 90 फीसद पर पहुंच गया। इसी बीच कोरोना आया। सरकार ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए वैक्सीन पर टाक्स फोर्स बना दी थी। वैक्सीन आने के बाद पहले लोगों को वैक्सीनेशन का काम केंद्र सरकार कर रही थी लेकिन फिर कुछ लोगो ने इसे राज्य को देने के बाद कही जिसके बाद सरकार ने राज्यों को वैक्सीन लगाने और खरीदने का अधिकार दिया लेकिन जिस तरह से राज्य सरकार इसे पूरा करने में फेल हुई उससे ये साफ हो गया कि वो इस काम को नहीं कर पा रहे हैं इसलिये केंद्र वैक्सीनेशन का काम भी अपने हाथो में लेता है।

जनता को समझ आया कौन रहा विफल

पीएम मोदी ने जिस तरह के अपने संबोधन में बिना नाम लिये अपने विरोधियों पर वार किये उसका असर जनता पर सीधा पड़ा इसमे कोई शक की बात हो ही नहीं सकता क्योंकि जनता साफ समझ चुकी है कि वैक्सीन और कोरोना आपदा के वक्त किसके कारण देश में कोहराम मचा। पीएम ने साफ किया कि कैसे पहले चरण में सारी व्यवस्था केंद्र ने की तो विश्व में देश की तारीफ तो हुई साथ ही देश में कोरोना के मामले भी कम हुए लेकिन जिस तरह से दूसरे चरण में राज्यों को कोरोना से निपटने के लिये छोड़ दिया गया तो क्या हाल हुआ। ये बात जनता को समझ में आ चुकी है। कि राज्यों की विफलता के चलते ही देश में कोरोना का इतना बड़ा विकराल रूप देखने को मिला।

जो लोग लगातार हल्ला मचा रहे थे कि पीएम चुप क्यों हैं, उनको अब लग रहा होगा कि पीएम आखिर क्यों बोले क्योंकि पीएम के बोलने के बाद ही उन सब की दुकान बंद होने का नबंर आ गया।

 

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