खिलौनों के जरिये आत्मनिर्भर बनाने की नींव पीएम मोदी ने रखी

यूं तो आत्मनिर्भर भारत बनने के लिये दौड़ पड़ा है लेकिन आज इस दौड़ में एक और चीज जुड़ी है वो है खिलौने जो हमारे बचपन को आत्मनिर्भर बनायेगी वो बचपन को जिसे हम मोबाइल गेम या फिर गैजेट के अत्याधुनिक माहौल में भूल गये हैं। लेकिन अब ऐसा न होगा क्योकि अब आने वाले दिनो में भारत के बच्चे भारत के बने हुए खिलौनो से ही खेलकर बड़े होंगे और आत्मनिर्भर बनेंगे। ‘द इंडिया टॉय फेयर 2021’ फेयर की शुरूआत पीएम मोदी ने करते हुए भारतीय निमार्ताओं से ऐसे खिलौने बनाने की अपील की, जो इकोलॉजी और साइकोलॉजी दोनों के लिए बेहतर हों।

भारतीय खेलों में ज्ञान और विज्ञान

इस कारोबार को कैसे नया रूप दिया जाये इसके लिये पीएम मोदी ने अपनी बात रखी। पीएम मोदी ने कहा, बाहरी बाढ़ ने लोकल व्यापार की कमर तोड़ दी है। खेल और खिलौने के क्षेत्र में भी भारत को आत्मनिर्भर बनाना है। बच्चे जो देखते हैं, वैसा ही चाहते हैं। उन्होंने सवाल किया, क्या बच्चे मास्क लगा हुआ खिलौना मांगते हैं? कोरोना काल की एक भावनात्मक तस्वीर का जिक्र करते हुए कहा, अभी दिल्ली में एक बच्ची अस्पताल में थी और उसको उसके खिलौने के साथ रखा गया था। राजस्थान की कठपुतली कला का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, कठपुतली हमारा खानदानी काम है। फिल्म हैं, थिएटर हैं लेकिन शायद ही कोई होगा जिसने कठपुतली का खेल न देखा हो। आज के प्रचार के युग में कठपुतली के खेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। भारतीय खेल और खिलौनों की ये खूबी रही है कि उनमें ज्ञान होता है, विज्ञान भी होता है, मनोरंजन होता है और मनोविज्ञान भी होता है। इस खासियत को ही हमे समूचे विश्व में फैलाना है जिससे भारत खिलौनो के निर्यातक देश के तौर पर भी जाना जाये।

खिलौनों के साथ भारत का रिश्ता पुराना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि खिलौनों के साथ भारत का रिश्ता उतना ही पुराना है, जितना इस भूभाग का इतिहास दुनिया के यात्री जब भारत आते थे, वे भारत में खेलों को सीखते थे और अपने यहां खेलों को लेकर जाते थे। आज जो शतरंज दुनिया में इतना लोकप्रिय है, वह पहले चतुरंग के रूप में भारत में यहां खेला जाता था। आधुनिक लूडो तब पच्चीसी के रूप में खेला जाता था। प्राचीन मंदिरों में खिलौनों को उकेरा गया है। खिलौने ऐसे बनाए जाते थे, जो बच्चों का चतुर्दिक विकास करें। आज हमे एक बार फिर से उसी दौर को जिंदा करना है जिससे भारत की खोई हुई छवि फिर हासिल हो सके।

पीएम मोदी एक तीर से दो शिकार की कहावत सिद्ध कर दी है जिसके तहत एक ओर भारत अब खिलौना कारोबार को लेकर जागरूक हो रहा है तो दूसरी तरफ चीन के साम्राज्य को भी चुनौती दी है कि जल्द ही इस तरफ उनके एकाधिकार को खत्म करके एक और गहरी चोट भारत देने वाला है।