पीएम मोदी- दुनिया की सबसे खुली और निवेश के अनुकूल अर्थव्यवस्था है भारत

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India is the world's most open and investment friendly economy

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को दुनिया की सबसे खुली एवं निवेश के लिए अनुकूल अर्थव्यवस्था बताते हुए ब्रिक्स देशों की कंपनियों और कारोबारियों से भारत में निवेश करने और वहां मौजूद असीम संभावनाओं तथा अनगिनत अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया।

PM modi  spoke at the BRICS Business Forum

ब्राजील की राजधानी ब्रासिलिया में ब्रिक्स व्यापार मंच को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विश्व की आर्थिक वृद्धि में ब्रिक्स देशों का हिस्सा 50 प्रतिशत है। विश्व में मंदी के बावजूद, ब्रिक्स देशों ने आर्थिक विकास को गति दी, करोड़ों लोगों को गरीबी से निकाला और प्रौद्योगिकी और नवाचार में नई सफलताएँ हासिल कीं है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत में सबसे ओपन और बिजनेस फ्रेंडली एनवायरमेंट है।

उन्होंने कहा कि ‘हम पाँच देशों को आपसी सामाजिक सुरक्षा समझौते पर भी विचार करना चाहिए। पीएम ने कहा कि भारत की राजनीतिक स्थिरता, पूर्वनिर्धारित नीति और व्यवसाय के अनुकूल सुधार के कारण वह दुनिया की सबसे खुली और निवेश के अनुकूल अर्थव्यवस्था है।

BRICS-Business-Forum

हम 2024 तक भारत को 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना चाहते हैं। बुनियादी ढांचा क्षेत्र में अकेले 1,500 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत है।” उन्होंने कहा ,”मैं ब्रिक्स देशों की इकाइयों से भारत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने और उसे बढ़ाने का आग्रह करता हूं।” प्रधानमंत्री ने कहा, ” विश्व की आर्थिक वृद्धि में ब्रिक्स देशों का हिस्सा 50 प्रतिशत है। वैश्विक सुस्ती के बावजूद , ब्रिक्स देशों ने आर्थिक वृद्धि को रफ्तार दी , करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला और प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में नई सफलताएं हासिल कीं। ब्रिक्स की स्थापना के 10 साल बाद अब भविष्य में हमारे प्रयासों की दिशा पर विचार करने के लिए यह फोरम एक अच्छा मंच है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, निजी क्षेत्र से मेरा अनुरोध है कि वे मानव संसाधन पर केन्द्रित इन प्रयासों से जुड़ें। युवा उद्यमियों को इन पहलों से जोड़ना भी कारोबार और नवाचार को ताकत देगा। उन्होंने कहा, “मैं भारतीयों को बिना वीजा के ब्राजील आने देने के निर्णय के लिए ब्राजील के राष्ट्रपति को धन्यवाद देता हूं। हम पांच देशों को सामाजिक सुरक्षा समझौते पर भी विचार करना चाहिए।”

 


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