भ्रम और अफवाह में बन रहा दिल्ली में पीएम मोदी हाउस

जब एक तरफ पीएम मोदी और उनकी सरकार लगातार कोरोना से देश को निजाद दिलाने के लिये रात दिन रणनीति बना रही है तो दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे भी है जो उनके खिलाफ लोगों के दिलो में भ्रम और अफवाह के बीच बो रहे है, वो बोल रहे है कि पीएम इस आपदा के वक्त अपना घर बनवाने में लगे है। ऐसे में इस बात में कितनी सच्चाई है चलिये हम आपको बताते है।

कोरी बकवास है पीएम मोदी का बंगला

कुछ लोगों ने देश में एक अफवाह तेजी से फैलाया है कि देश आपदा से जूझ रहा है और मोदी जी अपना बंगला बनवा रहे है। जो कोरी बकवास है। क्योकि सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत अभी तक पीएम आवास का काम शुरू ही नहीं हुआ है। और इसपर एक मजे की बात ये है कि लोग बोल रहे है कि मोदी अपना निवास बनवा रहे है जबकि वो पीएम आवास होगा। जो मोदी जी का नहीं बल्कि सरकार का होगा। वैसे इस योजना के तहत अभी तक सिर्फ नये संसद भवन और सचिवालय को बनाने का काम शुरू हुआ है। वो भी इस लिये क्योकि पुरानी संसद में अब विस्तार नही किया जा सकता है। इसके साथ यहां ये भी साफ कर दे कि जो संसद बन रही है उसका ठेका टाटा कंपनी को 862 करोड़ में मिला है। जबकि सेंट्रल विस्टा पर 477 करोड़ रूपये खर्च करने के लिये दिये गये है। इसमें कही भी पीएम आवास का जिक्र तक नही किया गया है उसके बाद भी कुछ लोग अफवाह उड़ाकर सरकार को बदनाम करने जुटे है।

 अपनी आयु से 25 से 30 साल ज्यादा जी चुका संसद भवन

नए संसद भवन निर्माण को लेकर देश की राजनीति गर्म है, इसे रोकने के चौतरफा प्रयास हो रहे हैं। लेकिन शायद इन्हें अहसास नहीं कि भव्य दिखने वाला संसद भवन अपनी आयु से लगभग 25-30 वर्ष ज्यादा जी चुका है। अगले पांच साल के बाद होने वाले परिसीमन और उसके कारण सांसदों की बढ़ने वाली संख्या को बिठाने के लिए स्थान की बात फिलहाल भूली भी जाए तो भी यह भवन भार ढोने के लिए तैयार नहीं है। वर्ष 2012 में ही सीपीडब्लूडी के चीफ इंजीनियर ने बता दिया था कि अब सेस्मिक जोन-4 में आ चुके दिल्ली में भूकंप संसद भवन के लिए सुरक्षित नहीं है। यह बात सार्वजनिक है कि 2012 में तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने नया संसद भवन बनाने का प्रस्ताव दिया था। उनके पत्र में भी भवन के पुराना और असुरक्षित होने की बात थी। साथ ही भविष्य में सांसदों की बढ़ने वाली संख्या के मद्देनजर पर्याप्त जगह की जरूरत बताई गई थी। उस पत्र के एक पखवाड़े बाद ही 20 जुलाई को 2012 को सीपीडब्लूडी के चीफ इंजीनियर ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए स्पष्ट किया था कि 2001 के भुज भूकंप के बाद ही सीपीडब्लूडी ने संसद भवन पर पड़ने वाले प्रभाव के अध्ययन के लिए एक कमेटी बनाई थी। जिसमे  यह पाया गया था कि ‘लोड बीय¨रग मैसोनरी स्ट्रक्चर’ में बने भवन सामान्यतया 60-65 साल के लिए होते हैं। ऐसे में नये संसद भवन को तैयार करना बहुत जरूरी है।

मजे की बात तो ये है कि ये बात सभी जानते है लेकिन बस सरकार पर निशाना साधने के लिये भ्रम और अफवाह फैलाकर जनता के बीच मोदी की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है लेकिन कोशिश कितनी भी की जाये जब सरकार ईमानदार होती है तो सारी कोशिश पीछे रह जाती है। जो अभी भी हो रहा है।