70 साल की खामियों को दूर किया पीएम मोदी ने ….

कोरोना वायरस  से लड़ाई के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  के पीएम केयर्स फंड  को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सीडीडीईटी की एक रिपोर्ट में कई खुलासे हुए हैं, द सेंटर फॉर डिसीज डायनेमिक्स, इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसी की रिपोर्ट में इस बात का पता चला है कि पीएम केयर्स फंड का पैसा कहां-कहां खर्च हुआ और इसे देश में कोरोना की लड़ाई के लिए किन संसाधनों में लगाया गया है।

पीएम केयर्स फंड का पैसा यहां हुआ इस्तेमाल

पीएम केयर्स फंड को लेकर उठ रहे सावालों के बीच में अब ये साफ हो गया है कि इसमे जमा पैसे से  कोरोना महामारी से निपटने के लिये क्या क्या उपाये किये गये है। रिपोर्ट के मुताबिक पता चला है कि 2000 करोड़ रुपये 50,000 मेड इन इंडिया वेंटिलेटर के लिए दिए गए। एक हजार करोड़ रुपये प्रवासियों के कल्याण के लिए दिए गए। सौ करोड़ रुपये वैक्सीन बनाने के लिए दिए गए। जिससे देश में स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाए और कोरोना से आने वाले वक्त में तेजी से जंग में जीत हासिल किया जाए लेकिन इन सबके बीच एक रोचक बात ये पता चली है कि पहले की सरकारे हमारी हेल्थ केयर सिस्टम को लेकर कितना संवेदनशील थी क्योंकि आजादी के बाद से देश में अब तक सिर्फ 47000 वेंटिलेटर मशीने ही तैयार हुई थी जबकि मोदी जी ने एक झटके में इससे काफी अधिक मशीने देश को दी है। इतना ही नही पीएम मोदी हेल्थ सेक्टर को लेकर कितने संवेदनशील है ये इसी बात से जाना जा सकता है कि मोदी1.0 में ही मोदी ने देश के गरीब लोगों के लिए आयुष्मान योजना शुरू की जिसके तहत 5 लाख रूपये तक का इलाज गरीबों को आज फ्री में मिल रहा है। यही संवेदशीलता ही थी कि कोरोना से निपटने के लिए सरकार ने पहले दिन से ही कदम उठाने शुरू कर दिये थे इसी के तहत अब सरकार ने इस काम से देश की हेल्थ व्यवस्था को और मजबूत किया है।

किस तरह PMNRF से अलग है PM केयर्स फंड

वहीं पीएम केयर्स, पीएमएनआरएफ (PMNRF) से किस प्रकार अलग है इस बात का भी पता चला है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष का उपयोग मुख्य रूप से प्राकृतिक आपदा के कारण संकट में पड़े व्यक्तियों, परिवारों की मदद करने में विकसित हुआ है। पीएमएनआरएफ में कोविड-19 जैसी स्थिति से एक संगठित तरीके से निपटने के लिए कोई प्रावधान नहीं है। पीएम केयर्स स्वास्थ्य सेवा या फार्मास्युटिकल सुविधाओं को अपग्रेड करने, अन्य बुनियादी ढांचे, प्रासंगिक अनुसंधान की फंडिंग आदि से एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल में राहत या सहायता का समर्थन देता है। ये PMNRF के अंतर्गत नहीं आते हैं। वही प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष के बोर्ड में  प्रधानमंत्री, कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष, निजी उद्योगों के प्रतिनिधि होते हैं, जबकि  पीएम केयर्स के बोर्ड में प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, गृह मंत्री, रक्षा मंत्री सभी पदाधिकारी होते हैं। ऐसे में ये ज्यादा पार्दर्शी तरीके से काम करती है।

बहरहाल यहां सोचने वाली बात ये है आजादी के बाद अब तक सिर्फ 47000 ही वेंटिलेटर मशीने क्यों आई  आखिर क्यों किसी का इन मशीनो की तरफ ध्यान नही गया। ये सवाल है जिसका जवाब आपको देना है क्योंकि सच आप सब जानते हैं।