पीएम मोदी निंदक का करते हैं पूरा सम्मान    

आज संत करीब का एक दोहा याद आ रहा है जो इस प्रकार है

निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय, बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय

मतलब इस दोहे का ये है कि जो हमारी निंदा करता है, उसे अपने अधिक से अधिक पास ही रखना चाहिए क्योंकि वह बिना साबुन और पानी के हमारी कमियां बताकर हमारे स्वभाव को साफ कर देता है लेकिन ज्यादातर सत्ता में बैठे लोग इस दोहे से दूर होते हुए आपने देखा होगा। इस बार एक रोचक तथ्य सामने आया है जिसमें सत्ता पर काबिज पीएम मोदी जी ट्वीटर पर अपने घोर विरोधियो को भी फॉलो करते है जबकि कुछ लोग विपक्ष में होने के बावजूद भी ऐसे लोगो को ट्वीटर ने अनफॉलो कर देते है।

पीएम मोदी आलोचकों को भी करते फॉलो

पीएम मोदी अकसर ये कहते हुए सुनाई देते है कि वो उड़ना नहीं चाहते, वो देश की जड़ो से जुड़ना चाहते हैं। इसी लिये वो भारतीय संस्कृति को मानते हुए हमेशा अपनी निंदा और सरकार की अलोचना करने वालो का भी सम्मान करते है और उन्हे सोशल मीडिया यानी ट्वीटर के जरिये हमेशा फालो करते है। उदाहरण के तौर पर पीएम अभी भी नवजोत सिंह सिद्धू और कीर्ति आजाद जैसे विपक्षी नेता अपने ट्विटर में उनकी बहुत आलोचना करते हैं। कुछ साल पहले बीजेपी छोड़कर विपक्षी खेमे में चले जाने के बाद भी पीएम ने उनको फॉलो करना जारी रखा है। ऐसा ही एक और उदाहरण पूर्व बीजेपी नेता प्रद्योत बोरा का है, जिन्होंने 2015 में बीजेपी छोड़ दी थी और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थापना की थी. लेकिन पीएम मोदी ट्विटर पर उन्हें भी फॉलो करते हैं। बीजेपी के एक और पूर्व नेता उदित राज, जिन्होंने कांग्रेस में शामिल होने के लिए इस्तीफा दे दिया था और मोदी सरकार के बेहद आलोचक हैं, लेकिन पीएम मोदी ट्विटर पर उन्‍हें अभी भी फॉलो करते हैं। पीएम मोदी ट्विटर पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी फॉलो करते हैं, जिन्होंने कुछ साल पहले एक ट्विटर में उन्हें ‘झूठा और मनोरोगी’ कहा था। इसके साथ ही पीएम मोदी अपने बड़े आलोचक राहुल गांधी को भी फॉलो करते हैं। इतना ही नहीं साल 2014 में मोदी जी ने जब सत्ता संभाला तो उन्होने पाया कि पुराने प्रधानमंत्री कार्यालय के ट्विटर अकाउंट ने सैकड़ों लोगों को ब्लॉक कर दिया था। लेकिन नए शासन के तहत उन सभी को अनब्लॉक कर दिया गया था।

विपक्ष में होकर भी कुछ लोगों को निंदा पंसद नहीं

तो दूसरी तरफ कुछ ऐसे लोग भी है जो थोड़ी सी निंदा भी बर्दाश्त नहीं कर पाते है और इतना बुरा मान जाते है कि तुरंत उन्हे अपने ट्विटर से अनफॉलो। मजे की बात तो ये है कि ऐसे लोग जो इस संसार को छोड़ गये है यानी की जिनका स्वर्गवास हो गया है उनको नहीं हटाते है जैसे लगता है कि वो अभी भी इन्हे गुरू मंत्र देते है। इससे ये साफ पता चलता है कि उन्हे सिर्फ जी हूजूरी ही पंसद है और जो ऐसा नहीं करता उसपर ये खफा हो जाते है।

लेकिन इसके पीछे एक मत ये भी है कि जिसके संस्कार भारतीय नहीं होगे वो ही निंदा करने वालो को कोसेगे या उन्हे सजा देगे क्योकि हमारी संस्कृति तो सब को साथ लेकर चलने को ही कहते है फिर वो आलोचक हो या आपका समर्थक क्योकि भारत के लोकतंत्र का यही तो प्रणवायु है।