‘देश बड़ा दल नहीं’ भावुक होकर पीएम मोदी ने दिया संदेश

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

दिल्ली में हुए दंगे के बीच पीएम नरेंद्र मोदी भावुक हो गए। संसदीय दल की बैठक में पीएम मोदी ने हिंसा का सीधा जिक्र किए बिना कहा कि देश में शांति और एकता जरूरी है जिसके लिए सरकार हर वक्त काम करती रहती है।

दिल्ली में हुए दंगों की जो तस्वीर सामने आ रही है; उसे देखकर कठोर से कठोर दिल भी भावुक हो जाये, फिर पीएम मोदी का दिल तो कमल के फूल की तरह कोमल है उसका भावुक होना कोई नई बात नही होगी। ऐसा ही देखा गया संसदीय दल की बैठक में दिल्ली हिंसा का सीधा जिक्र किए बिना पीएम मोदी भावुक हो गये। इस दौरान मोदी ने अपना नारा भी दोहराया कि सबका साथ, सबका विकास के साथ-साथ सबका विश्वास भी जरूरी है।

मोदी बोले- देश पहले, दल बाद में

इस मौके पर पीएम मोदी ने अपने सांसदों को समझाया; कि ये बात सभी समझ लें देश सर्वोपरि है। विकास बीजेपी का मंत्र है और इसके लिए शांति एकता और सद्भाव जरूरी है। ये ध्यान में रखते हुए विकास को आगे ले जाना है। इतना ही नही उन्होने यहां से संदेश भी दिया कि दल के लिये काम करना कोई गलत बात नही है, लेकिन देश को नुकसान पहुंचाकर किया गया काम गलत होगा, ऐसे में दल से ऊपर हमेशा देश को हमे रखना है। हालांकि उन्होने तंज कसते हुए ये भी बोला कि कुछ दल आज अपने को बचाने के लिए देश में हिंसा का माहौल पैदा कर रहे हैं। एक दूसरे को लड़ा रहे है, जो गलत है। ऐसे लोगों का सच बताना भी हमारी जिम्मेदारी है। वरना आज कल तो कुछ लोगो को वंदे मातरम् बोलने में परहेज होता है तो कुछ को भारत माता की जय बोलने में शर्म आती है। लेकिन ऐसे लोगों का सच हमे बताना है और राष्ट्र से बड़ा कुछ नही; जनता के बीच में ये संदेश देना है।

सटीक वक्त पर पीएम मोदी का बयान

जिस मौके पर पीएम मोदी ने ये बयान दिया है, अगर उसके समय पर गौर करे तो ये बयान सटीक वक्त पर आया है। सच में देश से बड़ा कोई नहीं होता लेकिन कुछ लोग आज इस बात को भूल गये हैं, जिसकी वजह से दिल्ली में हिंसा का वो दौर देखा गया जिसे याद करके भी आत्मा दहल जाती है। लेकिन कुछ लोगो ने सिर्फ सरकार को बदनाम करने के लिए देश की छवि को खराब करने का काम किया।

लेकिन दोस्तों अब भी कुछ नही हुआ है, बस हमे ऐसे लोगों से सचेत रहना होगा और ऐसे लोगों की बातों में न आकर देशहित के लिये पीएम मोदी के साथ लगकर काम करना होगा साथ ही विश्व में ये दिखाना होगा कि भारत में सभी धर्म के लोग न केवल मिलजुलकर रहते है, बल्कि आपसी सदभाव के मंत्र को ध्यान में रखकर विकास की ओर बढ़ भी रहे हैं।

 


  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •