एक हफ्ते में चुनाव आयोग ने पीएम मोदी को तीसरी बार दी क्लीनचिट

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनाव आयोग ने एक और क्लीन चिट दे दी है| गुरुवार को आयोग ने कहा है कि उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘परमाणु हथियार’ वाले बयान में आचार सहिता का उल्लंघन नहीं दिखता है| हालाँकि इसके अलावा चुनाव आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ भी आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत को खारिज कर दिया है| जिसमे राहुल गांधी ने एक चुनावी कार्यक्रम में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और उनके बेटे जय शाह को लेकर टिप्पणी किया था|

चुनाव आयोग द्वारा इस मसले पर क्लीन चिट दिए जाने को लेकर ख़ास बात यह है कि इस हफ्ते का यह तीसरा मौका है जब आयोग ने प्रधानमंत्री को उनके किसी बयान को लेकर की गई शिकायत पर क्लीन चिट दी है| इस सम्बन्ध में अधिकारियों ने बताया कि आयोग ने मामले की विस्तार से जांच की और यह ‘‘यह माना गया कि इस मामले में मौजूदा परामर्शों/ प्रावधानों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है|’’ उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने कहा, बाड़मेर संसदीय क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारी द्वारा भेजे गए 10 पृष्ठों के भाषण की पूर्ण प्रमाणित प्रतिलिपि की जांच की|

मालूम हो कि बीती 21 अप्रैल को राजस्थान के बाड़मेर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा था, ‘वे हमेशा कहते हैं कि ‘हमारे पास परमाणु बटन है’. तो हमारे पास क्या है? क्या हमारे परमाणु हथियार दिवाली के लिए हैं?’

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उधर इससे पहले नरेंद्र मोदी ने नौ अप्रैल को महाराष्ट्र के लातूर में कहा था कि देश के नए मतदाता वोट देते समय पुलवामा आतंकी हमले के शहीदों और बालाकोट एयर स्ट्राइक को अंजाम देने वाले वीर पायलटों को ध्यान में रखें| चुनाव आयोग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस बयान को भी क्लीन चिट दे चुका है| मालूम हो कि तब विपक्षी पार्टियों ने पीएम मोदी पर सशस्त्र बलों का बार-बार आह्वान करके आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था| जिसे आयोग ने सिरे से ख़ारिज करते हुए क्लीन चिट दे दिया|

जबकि, इस बयान से पहले एक अप्रैल को वर्धा में प्रधानमंत्री ने कहा था कांग्रेस पार्टी और उसके अध्यक्ष बहुसंख्यकों वाले चुनावी क्षेत्रों से भाग रहे हैं और उन इलाकों (वायनाड) में चुनाव लड़ रहे हैं जहां अल्पसंख्यक बहुसंख्या में हैं| आयोग ने इस मामले में भी मोदी को क्लीन चिट देते हुए कहा था कि उसे इस बयान में जन प्रतिनिधि कानून की संबंधित धाराओं का उल्लंघन नहीं दिखता|