पीएम मोदी जिस गरुड़चट्टी में आज कर रहे है ध्यान, 34 साल पहले यही पर कर चुके है तपस्या

करीब डेढ़ महीने तक चली लोकसभा चुनाव की थकान भरी कवायद के नतीजे आने से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज भगवान शिव की आराधना करने केदारनाथ पहुंचे| उनकी कमर में भगवा वस्त्र बंधा था और सिर पर पहाड़ी टोपी थी। उन्होंने बाबा केदारनाथ के मंदिर में करीब आधा घंटा पूजा-अर्चना की। इस दौरान शांति पाठ और रुद्राभिषेक हुआ। पूजा के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने वहां मौजूद लोगों का अभिवादन स्वीकार किया और निर्माण कार्यों की जानकारी भी ली। इसके बाद पीएम मोदी सतरंगी छाता और छड़ी लेकर पैदल ही गरुड़चट्टी गुफा की ओर रवाना हो गए| इस दौरान उनके साथ सुरक्षा कर्मी मौजूद थे। आपको बता दें कि, गरुड़चट्टी पीएम मोदी की तपस्थली कही जाती है, जिसका जिक्र खुद प्रधानमंत्री भी अनेको मौको पर कर चुके है|

साल 2013 में आये भीषण आपदा से गरुड़चट्टी भी अछूता नहीं रहा था| इससे पहले साल 2010 में आये आपदा के दौरान भी इसका संपर्क मार्ग ध्वस्त हो गया था| जिसका नतीजा था कि यह कई सालो तक वीरान पड़ा रहा| लेकिन बीतते समय के साथ एक बार फिर से गरुड़चट्टी सुर्खियों में है। अब इसके रामबाड़ा से दूसरी पहाड़ी पर लिनचोली होते हुए केदारनाथ तक नया पैदल मार्ग बनाया गया है। जिसके सहारे लोग यहाँ पहुँचते है

गरुड़चट्टी को लेकर बुजुर्ग तीर्थपुरोहित श्रीनिवास पोस्ती का कहना है कि केदारनाथ यात्रा में गरुड़चट्टी का विशेष धार्मिक महत्व है। यह स्थान आध्यात्म व ध्यान साधना के लिए विश्व प्रसिद्ध है। मन की शांति के लिए दशकों से सैकड़ों साधु-संत यहां पहुंचते रहे हैं।

मालूम हो कि, प्रधानमंत्री कई अलग-अलग मौको पर इस बात का जिक्र कर चुके है कि वे साल 1985 से 1990 के पांच साल के दौरान गरुड़चट्टी में एक संन्यासी की तरह रहे थे। थे। तब वे रोज यहां से केदारनाथ मंदिर पहुंचकर बाबा केदार के दर्शन और जलाभिषेक करते थे। बीते वर्ष 3 मई और 20 अक्तूबर को भी केदारनाथ पहुंचने पर पीएम मोदी ने यहां बिताए हुए दिनों को याद किया था।

आपको बता दें कि इससे पहले इस स्थान तक पहुंच मार्ग बनाने के साथ इसे विकसित करने के लिए उन्होंने सम्बंधित अधिकारियों को निर्देश दिया था| जिसके फलस्वरूप मुख्य सचिव उत्पल कुमार के आदेश पर जिला प्रशासन द्वारा लोनिवि की मदद से मार्ग बनाने को सर्वे किया गया था। जिसके बाद यह मार्ग बनकर तैयार हुआ|