राष्ट्र प्रथम की सियासत करते हैं पीएम मोदी

राजनीति में हाशिये पर पड़े विकास के मुद्दे को मोदी सरकार एक बार फिर से आगे ले आई है। देश के लोगों ने इस बदलाव को न केवल स्वीकार कर लिया है बल्कि उन्हें यह रास भी आ रहा है। इसलिए आज जाति धर्म की सियासत जनता को पंसद नही आ रही है।

जनता को भाया विकास का मुद्दा

ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गीता के इस उपदेश को जीवन में उतार लिया है कि कर्म करो, फल की इच्छा मत करो। शायद फल की इच्छा किए बिना काम में लगे रहने की प्रवृत्ति ही है, जो उन्हें लीक से हटकर चलाती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का चौथा आम बजट यही कहता है। मोदी सरकार ने तात्कालिक राजनीतिक लाभ के प्रलोभन से परहेज किया। सरकार चाहती तो चुनावी फायदे के लिए लोकलुभावन घोषणाएं कर सकती थी, लेकिन देश और अर्थव्यवस्था के व्यापक हित को तरजीह देना बेहतर समझा गया। मोदी सरकार के इस बजट में पूंजी निवेश को प्राथमिकता दी गई है। पूंजी निवेश से विकास दर को बढ़ाना और रोजगार के नए अवसर जुटाना सरकार की प्राथमिकता है, पर जैसा कि पिछले करीब सात साल का चलन है, विरोध के लिए विरोध विपक्ष का एकमात्र हथियार है और वो सिर्फ इस लिये कर रहे है लेकिन पीएम मोदी ने दिखा दिया कि उनके लिए देश का विकास पहले है और चुनाव बाद में है।

जनता खुद आज देती विपक्ष को जवाब

विपक्ष की नजर में मोदी और उनकी सरकार की कोई विश्वसनीयता नहीं है। इसके उलट जनता की नजरों में मोदी से ज्यादा कोई विश्वसनीय नेता देश में नहीं है। वास्तव में यह संघर्ष मोदी बनाम विपक्ष नहीं है। यह देश के आम लोगों और विपक्ष के बीच का संघर्ष है। मोदी को तो लड़ने की जरूरत ही नहीं पड़ रही है। मोदी पर हर हमले का जवाब तो जनता ही दे रही है। जवाब जनता दे रही है, इसका मतलब यह नहीं कि मोदी जी की टीम  हर चुनाव जीत रही है या जीतेगी। राज्यों में चुनावी हार-जीत कोई बड़ी बात नहीं है। उससे मोदी का विजय रथ रुकता नहीं। यह युद्ध के बीच में लड़ी जाने वाली छोटी लड़ाइयां हैं, जिनमें हार-जीत की अहमियत महज तात्कालिक है। लेकिन मुख्य जंग जो 2024 में होना है। उसके लिए मोदी जी का मास्टर प्लान इस बजट में देखने को मिला है।

जिसके बाद ये साफ होता है कि पीएम मोदी के लिए राष्ट्रनिर्माण प्रथम है तभी वो दूसरी पार्टियों की तरह सिर्फ सत्ता में रहने के लिये वादे नही करते बल्कि वादो को पूरा करने के लिये बजट में प्रवधान भी करते है। जिसका असर आज नये भारत के रूप में हम सभी को दिख रहा है।