आयुर्वेद के वजूद को जिंदा करते पीएम मोदी  

एक तरफ जहां पीएम मोदी भारतीय संस्कृति का विस्तार सारे जग में करने में लगे है तो दूसरी तरफ आयुर्वेद के खोए हुए वजूद को फिर से जिंदा करने में लगे हैं। इसी क्रम में अब मोदी सरकार ने एक अहम फैसला लिया है जिसके चलते अब आयुर्वेद के पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टरों को सर्जरी करने की भी परमिशन दे दी गई है।

58 तरह की सर्जरी की इजाजत

भारत सरकार ने अपने नोटिफिकेशन के जरिये आयुर्वेदिक डॉक्टरों को 58 तरह की सर्जरी करने की इजाजत दी है। यानी देश के आयुर्वेदिक पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टर भी एलोपैथिक डॉक्टरों की तरह ऑपरेशन कर सकेंगे। इन 58 तरह की सर्जरी में हड्डी रोग, आंखों की सर्जरी, कान-गला और दांत की सर्जरी, स्किन ग्राफ्टिंग, ट्यूमर की सर्जरी, हाइड्रोसील, अल्सर, पेट की सर्जरी शामिल हैं। भारत सरकार द्वारा जारी किए गये नोटिफिकेशन पर आयुष डॉक्टरों की सबसे बड़ी संस्था नेशनल इंटेग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन ने खुशी जताई है। इन लोगों का कहना है कि मोदी सरकार लगातार देश की जड़ो को मजबूत करने में लगी है और ये इसकी एक शुरूआत है।

2500 साल पुरानी सुश्रुत संहिता में है जिक्र

वहीं आयुर्वेद में सर्जरी के इतिहास की बात करें तो महर्षि सुश्रुत को सर्जरी का जनक माना जाता है। जब पश्चिमी देश सभ्यता के संकट से झूझ रहे थे तब ही 2500 साल पहले सुश्रुत ने सुश्रुत संहिता में सर्जरी के 100 से ज्यादा तरीके लिख दिए। इतना ही नहीं देश के एलोपैथिक चिकित्सक भी महर्षि सुश्रुत को ही सर्जरी का जनक मानते हैं। मॉडर्न सर्जरी की किताबों तक में महर्षि सुश्रुत को ‘फादर ऑफ सर्जरी’ माना जाता है जिससे ये साफ होता है कि शैल्य चिकित्सा में भारत युगों से ही बहुत आगे है और इस को फिर से बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार का ये कदम बहुत महात्वपूर्ण होगा।

जैसे पीएम मोदी कहते आये है कि उनका और उनकी सरकार का पहला मकसद है इस देश की जड़ो से जुड़ना जिससे मजबूत वृक्ष खड़ा किया जा सके और 6 साल से वो यही करने में लगे हैं। पहले योग के जरिये दुनिया को भारतीय संस्कृति से रूबरू करवाया तो अब आयुर्वेद के जरिए दुनिया में भारत की शैल्य चिकित्सा में ताकत को बताने की तैयारी है। कहते भी है न कि वही देश आगे बढ़ता है जो अपनी संस्कृति को आगे बढ़ाता है। मोदी जी वही करते हुए दिख भी रहे है।