पीएम मोदी की मानी बात, बदल गये गांव के हालात

कोरोना काल न केवल लोगों का जीवन बदला है, बल्कि कामकाज करने का भी अंदाज बदला है। खासकर खेती करने का खुद पीएम मोदी भी कई बार बोल चुके है कि खेती की पुरानी विधि से बाहर निकलना होगा, ककुछ ऐसा करना होगा जिससे देश को फायदा तो हो साथ में किसान की इनकम भी दोगनी हो। इसी क्रम में कम उपज, लाभदायक फसलों के न होने के ‘संक्रमण” को तुलसी की खेती ने वैक्सीन दे दिया है। चलिये आपको मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के आलोट गांव के किसानों के बारे में बताते है जो आज तुलसी की खेती करके ज्यादा मुनाफा उठा रहे है।

तुलसी की खेती ने बदला 250 किसानों का जीवन

कोरोना काल में जिस तरह से पीएम मोदी ने देश में एक नया तरह का जोश भरा आज उसका ही असर है कि देश में लाखों लोगो ने पुराने काम को छोड़कर कुछ नया किया जिससे उनका फायदा हुआ। कुछ इसी तरह की कहानी है मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के आलोट तहसील के करीब 250 किसानों का। इलाके में किसानों ने कम उपजाऊ जमीन पर जहां अन्य फसलें बेहतर नहीं हो पाती वहां वर्ष 2012 में 30 हेक्टेयर क्षेत्र में तुलसी की खेती को प्रयोग के रूप में शुरू किया। तुलसी ने अच्छा लाभ दिया और अब क्षेत्र के 1227 हेक्टेयर क्षेत्र में तुलसी की खेती की जा रही है। परंपरागत खेती के मुकाबले तुलसी की खेती कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली साबित हो रही है। किसानों को तुलसी के बीज के लिए प्रति क्विंटल तीस से पचास हजार रुपये तक मिल जाते हैं। औषधीय पौधे तुलसी पर कीटों का भी कोई असर नहीं होता इसलिए कीटनाशक की जरूरत नहीं पड़ती यानी लागत भी कम आती है। किसानों के अनुसार एक हेक्टेयर भूमि में तीन महीने में 10 हजार रुपये की लागत से 10 से 12 क्विंटल तुलसी बीज का उत्पादन होता है। इससे उन्हें तीन लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा हो रहा है। तुलसी का बीज नजदीकी नीमच मंडी में 30 से 35 हजार रुपये प्रति क्विंटल आसानी से से बिक जाता है।

तुलसी की खेती ने किसानों की आय की दोगनी

तुलसी की पत्तियां बहुत गुणकारी होती हैं, टहनियां भी उपयोगी होती हैं लेकिन स्थानीय स्तर पर बिक्री नहीं होने से किसान इसका उपयोग खाद के रूप में कर मिट्टी को उपजाऊ भी बना रहे हैं। किसानों के मुताबिक वे उसी जमीन पर तुलसी की खेती करते हैं, जिसमें दूसरी फसलों का उत्पादन कम होने लगता है। एक सीजन में तुलसी की खेती के बाद उसकी पत्तियों व टहनियों से बनी खाद से जमीन उपजाऊ बन जाती है। उद्यानिकी विभाग के आंकड़ों के अनुसार आलोट और ताल क्षेत्र में 33 किसानों ने पहली बार तुलसी की खेती की थी। इसके बाद मुनाफा देखकर अन्य किसान भी लगातार जुड़ते जा रहे हैं। अब आलोट क्षेत्र के 150 किसान तुलसी की खेती कर रहे हैं।

 

मन की बात हो या फिर कोई दूसरा मंच पीएम मोदी हर जगह से किसानों से ये अपील करते रहे है कि लीग से हटकर भी काम करके आप अपनी आय बढ़ा सकते है इसके लिये किसान चैनल से लेकर किसानों को जागरूक करने के लिये और भी कई तरीके अपनाये जा रहे है जिसका असर अब देश में दिखने भी लगा है जो देश के किसानों को आत्मनिर्भर तो बना ही रहा है बल्कि नये भारत की नई कहानी भी लिख रहा है।