नकारात्‍मकता के माहौल में पीएम मोदी ने फिर सकारात्मकता की गंगा बहाई

हमारे बुजुर्ग कहते हैं कि तीखापन स्वाद में होना चाहिए, स्वभाव में नहीं। कुछ यही बात राज्यसभा में मोदी के भाषण में देखने को मिला। अपने 16 मिनट भाषण में पीएम मोदी ने नकारात्मक राजनीति के माहौल में सकरात्मक सियासत का नया अध्याय जोड़ा। अब देखना ये होगा कि पीएम की इस बात को देश की सियासी लोग कैसे लेते है क्या वो बदलते है या फिर सिर्फ विरोध  ही करते रहते है।

नकारात्‍मक राजनीति पर पीएम मोदी का सकारात्‍मक संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुलाम नबी आज़ाद से अपनी दोस्ती का जिक्र किया और कश्मीर में हुई एक आतंकी घटना की कहानी बताने के दौरान उनकी आंखों से आंसू छलक आए। जिन शब्दों और भावनाओं के साथ प्रधानमंत्री ने आज गुलाम नबी आज़ाद से अपनी दोस्ती को याद किया।  वो भारत में सकारात्मक राजनीति का सबसे बड़ा उदाहरण है। क्योकि जिस तरह से इस वक्त देश में हर विषय पर नकारात्मक सियासत देखी जा रही है उससे ये साफ है कि देश को काफी नुकसान होने वाला है। क्योंकि सरकार अब कुछ नया कदम उठाने से पहले दस बार सोचेगी की क्या वो ये कदम उटाये क्योकि हर कदम के बाद सिर्फ सरकार का विरोध करना है इसलिये सड़क से ससंद तक सिर्फ हंगामा मचाना ठीक न होगा। अब वक्त आ चुका है जब देश के विकास के लिये सत्ता पक्ष और विपक्ष को एक साथ मिलकर काम करना होगा जिससे देश विश्व में एक अलग जगह बना सके।

मोदी सरकार के काम की हुई तारीफ

वैसे ऐसा नहीं है कि हमारे सभी सांसद सिर्फ मोदी सरकार के विरोध में ही कसीदे कसते रहते है कुछ सांसद ऐसे भी है जो सच को बोलने में पीछे नही हटते है ऐसा ही इस बार राज्यसभा और लोकसभा दोनो में देखने को मिला है जब विपक्ष के सांसद ये मान रहे हैं कि मोदी सरकार के कामो के कारण ही आज लाखों लोगों का जीवन बदला है। पीडीपी के सांसद मीर फयाद ने मोदी सरकार की तारीफ करते हुए बोला कि आज मोदी सरकार की वजह से ही घाटी की महिलाओं के घर में गैस पहुंचा दी गई है जिसके चलते अब उन्हे लकड़ी से छुटकरा मिल गया है। इतना ही नही उन्होने सभी सांसदों से अपील भी करते हुए बोला कि अगर सरकार ने काम किया है तो उसे कहना भी पड़ेगा और इसमे हमें हिचकिचाना नहीं चाहिये।

लोकसभा में भी ऐसी घटना देखने को मिली। डीएमके के सांसद टी आर बालू ने कोरोना को लेकर मोदी जी के कामकाज की तारीफ की। संसद में ऐसा माहौल कम ही देखने को मिलता है लेकिन सुबह जिस तरह से पीएम मोदी ने संसद के भीतर सकारात्मक सियासत की गंगा बहाई शायद उसका ही असर दोनो सदनों में देखने को मिला।

 

जो भी संसद में देखने को मिला उससे ये तो कहा जा सकता है कि भारतीय लोकतंत्र और मजबूत हुआ है जिसे तोड़ने के लिये कई विदेशी प्रयास हो रहे है। लेकिन मोदी जी ने सच बोला है लोकतंत्र महज हमारे लिये एक शब्द नही है बल्कि वो आत्मा है जो कभी भारत रूपी शरीर से नहीं जुदा हो सकती है।