पीएम केर्यस फंड से देश में बढ़े तीन गुना वेंटिलेटर

कोरोना को हराने के लिये केंद्र सरकार पिछले साल से ही कमर कस के लड़ रही है जिसके चलते मेडिकल उफकरण की खरीद भी जोरशोरो से की गई है। खासकर पीएम केर्यस फंड के जरिये सरकार ने वेंटिलेटर की कमी को दूर करने के लिए जमकर खरीदारी की है।

देश भर में बढ़े तीन गुना वेंटिलेटर

कोरोना को तभी हराया जा सकता है जब मेडिकल उपकरण की कमी न हो ये बात सरकार अच्छी तरह से जानती है तभी तो सरकार ने पिछले साल से ही वेंटिलेटर की कमी न हो इसके लिये कमर कस ली थी जिसका नतीजा ये हुआ की आज पिछले साल के मुकाबले इस साल तीन गुना ज्यादा वेंटिलेटर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशो के पास है। पीएम केयर्स के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अलॉट किए गए वेंटिलेटर) और स्वास्थ्य मंत्रालय) के पास सार्वजनिक अस्पतालों में महत्वपूर्ण देखभाल मशीनों की अवेलेबिलिटी पिछले साल की तुलना में आज तीन गुना अधिक है। जानकारी के मुताबिक, पिछले साल लगभग 16,000 वेंटिलेटर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास थे। हालांकि वर्तमान में इसकी संख्या बढ़कर 60,000 यानी कि तीन गुना ज्यादा हो गई है। सरकार की माने तो भारत में कोरोना महामारी के प्रसार और पीएम केयर्स फंड की स्थापना के बाद राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 43,800 वेंटिलेटर दिए गए हैं। गैर-सरकारी अनुमानों के मुताबिक, देश में सार्वजनिक और निजी चिकित्सा सुविधाओं में लगभग 47,500 वेंटिलेटर थे।

राज्यों से वेंटिलेटर का इस्तेमाल करने की अपील

ऐसे स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से वेंटिलेटर का इस्तेमाल करने की अपील की है। दरअसल, कई राज्यों में वेंटिलेटर मिलने के बावजूद इसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। ऐसे में पीएम मोदी ने भी नराजगी जताई थी और वेंटिलेटर की जानकारी के लिए ऑडिट का फैसला लिया था।सरकार ने कहा है कि राज्य के स्वास्थ्य विभागों के प्रतिनिधियों और बीईएल जैसे निर्माताओं के साथ व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं ताकि गड़बड़ियों और रखरखाव के मुद्दों को तेजी से सुलझाया जा सके। सरकार की माने तो पीएम केयर्स से खरीदे गये करीब 50 फीसदी वेंटिलेटर पिछले साल ही राज्य सरकारों को दे दिये गये थे और बाद में खरीदे गये वेंटिलेटर जरूरत के अनुसार दिये जा रहे है।

इससे तो यही पता चलता है कि मोदी सरकार तो लगातार कोरोना से लोहा ले रही थी लेकिन देश के कुछ राज्यों की सुस्ती का नतीजा है कि आज कोरोना देश पर भारी पड़ रहा है क्योकि अगर राज्य मेडिकल उपकरण ठीक से रखते तो जरूर कोरोना का इतना भयावर रूप देखने को नहीं मिलता ।