देहरादून में चालू हुआ प्लास्टिक वेस्ट से डीजल-पेट्रोल बनाने वाला प्लांट

Plastic waste to diesel-petrol plant

पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाने वाले घटकों में प्लास्टिक कचरे का बहुत बड़ा योगदान है| इस से निजात पाने के लिए कुछ विकसित देश प्लास्टिक कचरे से पेट्रोल, डीजल तथा अन्य केमिकल पदार्थ बनाने की व्यावसायिक तकनीक को अपना चुके हैं|

प्लास्टिक वेस्ट से डीजल-पेट्रोल बनाने वाला भारत बना चौथा देश

आपको ये जानकार आश्चर्य होगा की अपना देश भारत भी उन विकसित देशों की पंक्ति में खड़ा हो गया है जो प्लास्टिक कचरे से पेट्रोल और डीजल बनाने की शुरुआत कर चुके हैं| अपने देश में इस तरह का पहला प्लांट उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शुरू हो चूका है|

केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने किया उद्घाटन

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने 1 टन की क्षमता वाले इस प्लांट का शुभारंभ किया| फिलहाल यहाँ 800 लीटर डीजल बनाने का काम शुरू हुआ है| फ़िलहाल इस प्लांट को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है| व्यवसायिक रूप से शुरू होने पर, ऐसे प्लांट तीन साल के अन्दर अपनी लागत वसूल कर मुनाफा कमाने लगेंगे|

उद्घाटन के मौके पर केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि प्लास्टिक कचरे से निजात पाने और पेट्रोल-डीजल की बढती मांग को पूरा करने के लिए अब ऐसे प्लांट देश के अन्य राज्यों में भी लगाये जायेंगे| इस मौके पर उन्होंने कहा कि भारत की राजधानी दिल्ली में भी प्लास्टिक कचरे को प्रोसेस करके पेट्रोलियम इंधन बनाने की अपर संभावनाएं हैं| देश का सबसे बड़ा शहर होने के चलते, दिल्ली में प्लास्टिक कचरा भी ज्यादा होता है| उन्होंने आगे कहा की इस बार अगर दिल्ली में भाजपा की सरकार बनती है तो ऐसा प्लांट दिल्ली में भी लगाया जायेगा|

बता दें कि पर्यावरण की समस्या और ग्लोबल वार्मिंग जैसे वैश्विक मुद्दों से जूझ रही दुनिया के लिए प्लास्टिक कचरा एक बड़ी चुनौती है, और भारत सरकार इसकी रोकथाम के लिए “बीट द प्लास्टिक” अभियान चला रही है|