लॉकडाउन मे जज्बे के प्रतीक इन वीरों को सलाम

कोरोना के संक्रमण से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों के अधिकारी/कर्मचारी के साथ पुलिसकर्मी भी पूरी जिम्मेदारी से ड्यूटी में जुटे हैं। संकट के दौर में आंधप्रदेश के विशाखापट्टनम में नगर निगम कमिश्नर एक महीने के बेटे को छोड़कर ऑफिस में डटी हैं। कभी-कभी तो वे बच्चे को लेकर भी दफ्तर पहुंच जाती हैं। दूसरी घटना मध्य प्रदेश के जबलपुर की है। लॉकडाउन के बीच ड्यूटी पर पहुंचने के लिए एक पुसिल कॉन्स्टेबल कानपुर से जबलपुर तक 450 किलोमीटर पैदल चला। अब एसपी समेत पूरा पुलिस महकमा उनके जज्बे को सलाम कर रहा है।

विशाखापट्टनम की निगम कमिश्नर सृजना ने एक महीने पहले बेटे को जन्म दिया था। इस बीच, कोरोना के कारण लॉकडाउन शुरू हो गया। ऐसे में विशाखापट्टणम जैसे महानगर में निगम कमिश्नर की कितनी जरूरत होती है ये बताने की जरूरत नहीं। सृजना ने भी जिम्मेदारी समझते हुए ऑफिस जाने का फैसला कर लिया। वे इन दिनों बेटे को पति और मां के पास छोड़कर रोजाना ड्यूटी पर हाजिर हो रही हैं। वह साफ-सफाई के कामकाज की निगरानी भी कर रही है। यही नहीं, प्रसव से कुछ दिन पहले तक भी वह ड्यूटी पर थीं।

कोरोना से लड़ाई में मेरा भी योगदान जरूरी

सृजना ने भास्कर से बातचीत में कहा कि नवजात को मां की जरूरत होती है, लेकिन मैंने व्यक्तिगत जरूरतों को अलग रखा है। मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के आदेश और जिला प्रशासन के सहयोग से हम कोरोना नियंत्रण के लिए प्रयास कर रहे हैं। महामारी से निपटने में मेरा भी योगदान हो, इसलिए साफ-सफाई के साथ लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में जुटे हैं।

ड्यूटी ज्वाइन करने कॉन्स्टेबल 450 किमी पैदल चला

यूपी के कानपुर में रहने वाले आनंद पांडे मध्यप्रदेश पुलिस में सिपाही हैं। वे इन दिनों जबलपुर शहर के ओमती थाने में तैनात हैं। वे 20 फरवरी को पत्नी के इलाज के लिए छुट्टी लेकर अपने गांव आए थे, लेकिन इसी दौरान लॉकडाउन हो गया। इसबीच, छुट्टियां खत्म हो गईं, आनंद को ड्यूटी पर जबलपुर लौटना था। ऐसे में उन्होंने हार नहीं मानी और 30 मार्च को कानपुर से जबलपुर के लिए पैदल निकल पड़े। रास्ते में जहां कहीं लिफ्ट मिलती, वे बैठ जाते और फिर उतरकर पैदल चलने लगते थे। उन्हें जबलपुर पहुंचने में 3 दिन लगे। एसपी एस. बघेल समेत स्टाफ ने आनंद के जज्बे की सराहना की।