गरजने, बरसने के साथ मॉनसून सत्र में हुआ जमकर काम

लोकसभा का मॉनसून सत्र खत्म हो गया है और ये सत्र बहुत अहम रहा है। क्योंकि इस सत्र से हमारे सासंदों के छवि एक बार फिर से काम करने वालों की बनी है। इस सत्र मे साल 18 सालों के बाद सबसे ज्यादा काम हुआ है। यानी की पिछले 18 सालों मे जो संसद सिर्फ सियासी अखाड़ा और एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाने की जगह बन गई थी, उसकी तस्वीर जरूर बदली हैं।

21 बिलो पर लगी मोहर

तेलुगु देशम पार्टी द्वारा सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव से शुरू हुआ मॉनसून सत्र लोकसभा में हुए काम के नजरिए से बहुत अच्छा रहा, क्योंकि इस सत्र में 22 बिल पेश किये गये जिसमें 21  बिलों को हरी झंडी दिखा दी गई है। घर खरीदने वाले लोगों को सशक्त करने वाला बिल, पिछड़ों के लिए राष्ट्रीय आयोग के गठन को संवैधानिक बनाना और एससी/एसटी ऐक्ट, बैंक को चूना लगाकर भागने वाले भगोड़ो पर नकेल कसने के लिये भगोड़ा आर्थिक अपराध 2018 बिल,भ्रष्टाचार संशोधन बिल,दंडिक संशोधन बिल, राष्ट्रीय खेलकूद विश्वविधालय बिल,मानव तस्करी बिल के साथ साथ और भी कई बिल पास कर दिये गये, जिससे आम लोगों को एक बड़ी ताकत मिली है. हालांकि इस बार भी तीन तलाक बिल पर आम सहमति नहीं बन पाई।

18 साल बाद संसद मे जमकर हुआ काम

लोकसभा में निर्धारित किए गए समय से 110 फीसदी ज्यादा काम हुआ और राज्यसभा में 66 फीसदी काम हुआ। लोकसभा में 50 प्रतिशत तो राज्यसभा में 48 प्रतिशत समय कानून निर्माण के काम को दिया गया। यह वर्तमान सरकार में दिया गया सबसे ज्यादा समय है। इस सत्र में लगभग 26 फीसदी बिल संसदीय समितियों को भेजे गए। 15वीं लोकसभा में यह आंकड़ा 71 फीसदी था। 8 घंटे के व्यवधान की भरपाई के लिए लोकसभा में 20 घंटे ज्यादा कार्यवाही चली।

इस सरकार में यह सत्र प्रश्न काल के लिहाज से भी काफी अच्छा रहा। प्रश्नकाल के समय में लोकसभा में 84 फीसदी तो राज्यसभा में 68 फीसदी काम हुआ। इसमें 999 निजी बिल पेश किए गए। 16वीं लोकसभा में अब तक सबसे ज्यादा बिल कानून एवं न्याय मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की तरफ से पेश किए गए हैं।

सत्ता पक्ष ने इस सत्र में विपक्ष को खूब लगाई पटखनी

एक तरफ मॉनसून सत्र काम के लिये जाना जायेगा तो दूसरी तरफ सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे को पटखनी लगाने के लिये भी शह मात का खेल खेलते हुए दिखाई दिये। अविश्वास प्रस्ताव के वक्त जहां राहुल गाँधी ने पीएम मोदी को गले लगाकर देश की जनता के बीच में अपनी छवि सुधारने की कोशिश की तो तुंरत आंख मारकर पीएम मोदी को इस छवि पर हमला बोलने का मौका भी दे दिया। डिप्टी स्पीकर के चुनाव के वक्त सत्ता पक्ष की रणनीति के आगे विपक्ष एक जुट नही दिखा और विपक्ष की हार हुई। लेकिन राफेल मुद्दे पर जरूर कांग्रेस सत्ता पक्ष को घेरती हुई नजर आई और दूसरे दलो को भी साथ में खड़ा कर सकी।

खूब दिखा हंगामा

इस सत्र मे ऐसा नही की हंगामा नही देखा गया हो। राफेल मुद्दे पर कांग्रेस ने जमकर हंगामा किया तो वही एनआरसी के मुद्दे पर भी संसद के कई सत्र हंगामे के भेट चढ़ गयेI इसी तरह मुजफ्फरपुर रेप कांड हो या फिर देवरिया रेप कांड,गाहेबगाहे विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की और सत्र के 8 घंटे खराब किये। साथ ही साथ कालेधन पर आई फेक रिपोर्ट के सहारे भी विपक्ष हंगामा करते हुए दिखा।

हंसी के भी क्षण संसद में आये

अविस्वास प्रस्ताव का वक्त हो या फिर डिप्टी स्पीकर का चुनाव कई बार ऐसे मौके भी देखे गये जब संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसद हंसते हुए दिखे खासकर जब महाराष्ट्र के नेता और मोदी सरकार के मंत्री रामदास अठावले ने सदन मे अपना भाषण पढ़ा ये ऐसा मौका था जब पीएम मोदी और विपक्ष मे बैठी सोनिया गांधी भी अपनी हंसी नही रोक पाईI इतना ही नही मनमोहन सिंह जो हमेशा गंभीर दिखने वाले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी हंसी नही रोक पाये,तो दक्षिण भारत के महान नेता करूणानिधि के निधन के बाद संसद मे शोक की लहर देखी गई।

यानी की इस सत्र में जिस तरह का काम हुआ उससे जरूर आने वाले दिनों में केन्द्र सरकार को बल मिलेगा। लेकिन सियासत के इतर देशवासियों के बीच मे हमारे सांसदो की छवि भी बदलेगी। जिनपर हमेशा ये आरोप लगते रहे है कि वो संसद में सिर्फ हंगामा मचाने के लिये जाते हैं और आम लोगों की मेहनत की कमाई को बर्बाद करते हैं।