भारतीय संसद को भी लगी पीएम मोदी जैसे काम करने की आदत

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

मोदी जी की ईमानदार सरकार होने के चलते ही,संसद जिसे हम लोकतंत्र का मंदिर मानते है, आज वहाँ जनता के हितों के लिये विचारों की अरदास हो रही है तो स्वस्थ बहस से देश हित की आरती भी गाई जा रही है, राजनैतिक स्वार्थ को खत्म करके देश की भलाई के लिये अजान साफ सुनाई दे रही है, देखा जाये तो सच मायने में लोकतंत्र का मंदिर एक बार फिर से अपने सही रूप में दिख रहा है, जिसकी कल्पना हमारे पूर्वजों ने की थी।

संसद के पहले के सत्रों में झाँके तो लोकसभा हो या राज्यसभा दोनो जगह पर सिर्फ तर्क-कुतर्क होते हुए देखा, या फिर हंगामा और उसके बाद अनिश्चित काल के लिये सदन स्थगित का बयान.. लेकिन 17 वीं लोकसभा में ये सब एक इतिहास बन गया है, महज पहले सत्र में और चल रहे दूसरे सत्र में ही लोकसभा और राज्य सभा ने काम करने की वो क्षमता दिखाई है कि अब लोग इसका उदाहरण देने लगे है।   

लोकसभा

17वीं लोकसभा की बात करे तो सत्तादल और विपक्ष में कुछ नही बदला क्योकि एक बार फिर मोदी सरकार पर देश ने भरोसा दिखाया जिसका परिणाम हुआ की लोकसभा में भारी बहुमत के साथ पीएम मोदी की वापसी हुई। जिससे सत्ता पक्ष औऱ विपक्ष की सीट में कोई अंतर नही हुआ, लेकिन दूसरे पहलू से देखे तो इस बार संदन के भीतर नये चेहरों की बाढ़ थी, तो पुराने चेहरे पूरे जोश में दिख रहे थे, लेकिन ये जोश हंगामा करने के लिए नही, बल्कि देश के लिए कुछ बेहतर करने के लिये था, तभी तो पहले सत्र में लोकसभा में तय घंटे में 281 घंटे काम हुआ, तो 46% समय विधायी संबंधी कार्यों में बीता। ऑकड़ो पर नजर डाले तो 20 सालों में सबसे ज्यादा काम हुआ 36 फीसदी कामों को लोकसभा में पूरा किया गया और 35 बिलों को हरी झड़ी दिखाई गई। इससे पहले 1952 में बनी लोकसभा का 24 विधेयक पास करने का रिकार्ड भी टूट गया। इस बाबत सांसदों की मौजूदगी 94 फीसदी रही, जिसमें 96 फीसदी महिलाओं की हिस्सेदारी रही। पहली बार देखा गया, कि सुबह से रात तक संदन चला और सब सांसदों को बोलने का मौका भी मिला।

ये तो बात हो रही थी पहले सत्र की, लेकिन दूसरे सत्र में भी यही स्पीड संसद के भीतर बरकरार है। तभी पहली बार प्रश्नकाल के दौरान हर सवाल का मौखिक जवाब सरकार ने देकर एक नया रिकार्ड बनाया है। इससे ये साफ होता है कि प्रश्नकाल को मोदी सरकार कितना अहम समझती है। इस बार भी लोकसभा सुबह से शुरू होती है और देर रात तक चलती है। जिससे नये कानून बन रहे है और इन कानून का फायदा देश की जनता को मिल रहा है। दिल्ली की 70 साल से अटकी कच्ची कॉलोनियों का बिल हो या फिर ई-सिगरेट पर रोक या SPG को संसोधन करने का बिल सभी दूसरे सत्र में पास हो गये है, जो ये बता रहे है कि लोकसभा में काम की स्पीड क्या है।

राज्यसभा

चलिये अब बात करते है राज्य सभा की। राज्य सभा में तो काम इस तरह से तेजी के साथ किये जाने लगे कि अक्सर कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह हो या समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव सहित डी राजा जो नेता सरकार काम नही कर रही है कि बात करती थी वो ये सवाल खड़ा करने लगी कि आखिर सरकार इतनी तेजी से काम क्यो कर रही है। फिलहाल इन सब के बीच राज्यसभा में भी लोकसभा की तरह ही काम देखा गया. तय किये गये घंटो में राज्यसभा में कुल 195 घंटे काम हुआ, जो बीते 20 सालों की तुलना में सबसे ज्यादा रहा. कुल सवालों में 40% मौखिक रूप से पूछे गए. जो पिछले 20 सालों में सबसे ज्यादा है. इसी तरह शीतकाली सत्र में भी राज्यसभा में जमकर काम हो रहा है। ज्यादा दिन संदन 8-10 घंटे चल रहा है।सत्ता पक्ष विपक्ष को हर सवाल का जवाब दे रही है। इसके साथ साथ लोकसभा से पास किये गये बिल को भी तुरंत हरी झंडी दिखाई जा रही है।

मोदी जी की बुराई कोई भी कितनी करे लेकिन उनके काम करने की क्षमता के कायल सब है। सब उनके 18-20 घंटे काम करने की स्टाइल का लोहा भी मानते है। पीएम की यही कार्यकुशलता को अपनाने में कई नेता लगे भी है जिसका प्रमाण लोकसभा और राज्यसभा में देखा जाने लगा है। तभी हर दिन संसद के दोनो संदन नये नये आयाम छू रहे है। ऐसे में मोदी 2.0 जब अपने 5 साल पूरे करेंगी तो सोचिये कितने नये रिकार्ड हमारी संसद के नाम होगे। जिसका श्रेय सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनो के हिस्से में जाता है।


  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •