परमवीर चक्र विजेता निर्मलजीत सिंह सेखों के जन्म दिन पर विशेष

Flying Officer Nirmaljit Singh Sekhon | PC - ADGPI - Indian Army

हम ऐसे कई शूरवीरों का नाम जानते है जिन्होंने अंग्रेजों से आज़ादी की लड़ाई से लेकर पाकिस्तान के नापाक मंसूबे को मिटटी में मिलाने जैसे महत्वपूर्ण काम को अपने जान की बाज़ी लगाते हुए अंजाम दिया है| आइये आज एक ऐसे ही शूरवीर से आपका परिचय करवाते हैं, जिनका नाम है निर्मलजीत सिंह सेखों, जो पाकिस्तान के साथ 1971 की लड़ाई में भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग अफसर थे|

कौन है फ्लाइंग अफसर निर्मलजीत सिंह सेखों?

17 जुलाई 1945 को पंजाब के लुधियाना शहर के इस्सेवाल कसबे में जन्मे निर्मलजीत सिंह सेखों बचपन से ही विमानों और वायुसेना के जीवन से आकर्षित रहते थे| ऐसा इसलिए भी हो सकता है क्योंकि उनका क़स्बा हलवाड़ा में स्थित भारतीय वायुसेना बेस के करीब था| उनके पिता त्रिलोक सिंह सेखों ने भी वायुसेना में अपने सेवा का योगदान किया है और मानद फ्लाइट लेफ्टिनेंट के तौर पर सेवानिवृत्त रह चुके है| उनकी माता का नाम हरबंस कौर था|

निर्मलजीत ने अपनी पढाई लुधियाना के करीब स्थित खालसा हाई स्कूल से प्राप्त की और 1962 में इंजिनियरिंग के लिए आगरा के दयालबाग कॉलेज में दाखिला लिया| परन्तु भारतीय वायुसेना के प्रति उनके आकर्षण की वजह से उन्होंने बीच में अपनी पढाई छोड़ दी और भारतीय वायुसेना में शामिल हो गए| अक्टूबर 1968 में फ्लाइंग अफसर निर्मलजीत की नियुक्ति नंबर 18 स्क्वॉड्रन में हुई जिसे ‘फ्लाइंग बुलेट्स’ के नाम से भी जाना जाता है|

अपने अदम्य साहस से पाकिस्तान की तोड़ी कमर

1971 में हुए भारत-पाक युद्ध के समय निर्मलजीत भारतीय वायुसेना के जीनैट दस्ते में पायलट के तौर पर श्रीनगर में तैनात थे| बता दें की निर्मलजीत का दस्ता श्रीनगर में तैनात होने वाला भारतीय वायुसेना का पहला दस्ता था| इससे पहले 1948 में हुई अंतरराष्ट्रीय संधि की वजह भारतीय वायुसेना के किसी भी दस्ते को श्रीनगर में तैनात नहीं किया गया था|

श्रीनगर में पहली बार तैनात होने की वजह से निर्मलजीत यहाँ के मौसम, भूगोल, जलवायु इत्यादि से अनजान थे| पर इतनी मुश्किलों के बाद भी उन्होंने अपने अदम्य साहस और दृढ़ निश्चय से पाकिस्तानी घुसपैठिये विमानों की हालत ख़राब कर दी थी| 14 दिसंबर, 1971 को पाकिस्तानी वायुसेना ने जब छह एफ-86 जेट्स से श्रीनगर एयरफील्ड पर हमला किया तब निर्मलजीत ने उनके दो विमान मार गिराए और और उनके पराक्रमी आक्रमण के वजह से बाकी 4 को भागना पड़ गया| दुश्मन के आक्रमण के बीच निर्मलजीत ने अपनी उडान भरी और उसी समय पाकिस्तान के दो सेबर जेट को अपने निशाने पर लिया जिसमे एक विमान को सीधा निशाना लगाकर मार गिराया और दूसरे को नुकसान पहुंचा दिया जिसकी वजह से उसमे आग लग गयी और वो नष्ट हो गया|

दुश्मनों को उनके अंजाम तक पहुँचाने के क्रम में वो खुद भी दुश्मन के निशाने पर आ गए| ऐसे में उन्हें अपने बेस पर वापस लौटने के आदेश दिए गए, पर तकनीकी खराबी की वजह से उनका विमान गिर गया और वो शहीद हो गए|

आज निर्मलजीत भले ही हमारे बीच न हों पर उनके अदम्य साहस के किस्से उनके मरणोपरांत भी सदियों तक याद किये जायेंगे|