राफेल के आगे पाकिस्तान का F-16 फेल, चीन के J-20 को दे रहा है टक्कर

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भारतीय वायुसेना को पहला राफेल लड़ाकू विमान फ्रांस ने सौंप दिया है। मंगलवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने फ्रांस में एक गरिमापूर्ण समारोह में विजयादशमी के दिन दुनिया के सबसे मारक लड़ाकू जेट विमान राफेल (Rafale) को औपचारिक तौर पर प्राप्त किया। अहम् बात यह है की पहले राफेल का नाम अगले एयर चीफ आरकेएस भदौरिया के नाम पर रखा गया है। बता दे की देश के अब तक के सबसे बड़े रक्षा सौदे को मुकाम तक पहुंचाने में एयर चीफ आरकेएस भदौरिया ने अहम भूमिका निभाई थी । भदौरिया राफेल फाइटर विमान को उड़ा चुके हैं। वो राफेल फाइटर जेट को उड़ाने वाले भारतीय वायुसेना के पहले पायलट हैं।

Pakistan's F-16 fails in front of Rafael

राफेल के भारतीय वायुसेना में शामिल होने से वायुसेना के शक्ति में कई गुना इजाफा होगा । राफेल (Rafale) मिलने के बाद से भारत के दुश्मन देश कांप रहे हैं। ऐसे में आपके जेहन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इस राफेल (Rafale) में क्या है जो दुश्मन केवल नाम सुनकर ही इतने हैरान परेशान हैं।

भारत को मिले राफेल से पाकिस्तान परेशान है, भारत के लिए तैयार किए गए राफेल (Rafale) में मीटिअर और स्काल्प मिसाइलों को लैस किया गया है। इसके चलते यह बेहद खतरनाक हो गया है। इन दोनों मिसाइलों से लैस राफेल (Rafale) भारत के लिए गेमचेंजर साबित होगा। मीटिअर एडवांस एक्टिव रडार सीकर से लैस है। ये हर तरह के मौसम में वार करने में सक्षम है। तेज रफ्तार जेट से लेकर छोटे मानव रहित विमानों के साथ-साथ क्रूज मिसाइलों को भी निशाना बना सकती है।

स्काल्प करीब 300 किमी. तक मार करने वाली मिसाइल है। यह पहले से तय हमलों को नाकाम करने या फिर स्थिर लक्ष्यों को भेदने में दक्ष है। स्काल्प ब्रिटेन की रॉयल एयरफोर्स और फ्रांसीसी वायुसेना का हिस्सा है। इसे खाड़ी युद्ध के दौरान भी इस्तेमाल किया गया था। ये सर्जिकल स्ट्राइक जैसे एक्शन को और आसानी से अंजाम दे सकती है।

राफेल (Rafale) एक मल्टी रोल Combat जेट है, जिसे दुनिया का सबसे आधुनिक Fighter Jet माना जाता है। इतना आधुनिक विमान पाकिस्तान और चीन के पास भी नहीं है। छोटे आकार और सटीक निशाने की वजह से, राफेल (Rafale) Fighter Jet, को War Zone में Killer भी कहा जाता है। लड़ाकू विमानों की तुलना में लंबाई और चौड़ाई कम होने के साथ-साथ ये भार में काफी हल्का है। भारत को मिलने वाले राफेल की सबसे बड़ी खासियत Beyond Visual Range Air-To-Air Missile है, जिसकी रेंज 300 किलोमीटर से ज़्यादा है।

एक नजर में राफेल (Rafale) की खूबियां

 राफेल (Rafale) विमान एक बार में करीब 26 टन (26 हजार किलोग्राम) वजन ले जा सकता है।
 यह विमान 3,700 किलोमीटर के रेडियस में हमला करने में सक्षम है।
 यह महज एक मिनट में 36 से 60 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है।
 एक बार फ्यूल भरने पर यह लगातार 10 घंटे की उड़ान भर सकता है।
 इस विमान से हवा से जमीन और हवा से हवा में दोनों में हमला किया जा सकता है।
 राफेल पर लगी गन एक मिनट में 2500 फायर करने में सक्षम है ।
 यह 2,130 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम है।
 यह 18,288 मीटर/मिनट की रफ्तार से ऊंचाई पर पहुंचता है जबकि एफ-16 की रेट ऑफ क्लायइंब 15,240 मीटर/मिनट है।
 राफेल में जितना तगड़ा रडार सिस्टम है उतना एफ-16 में नहीं है। राफेल का रडार सिस्टम 100 किलोमीटर के दायरे में एक
बार में एकसाथ 40 टारगेट की पहचान कर सकता है जबकि पाकिस्तािन के एफ-16 का रडार सिस्टम केवल 84 किलोमीटर के दायरे में केवल 20 टारगेट की ही पहचान करने में सक्षम है।

राफेल भले ही एफ-16 पर भारी पड़ रहा हो लेकिन चीन के जे-20 श्रेणी के विमानों की चुनौती बड़ी है। चीन के जे-20 विमानों की कॉम्बैट रेडियस 3400 किलोमीटर है जिसके आगे राफेल नहीं टिकता है। चीन का यह विमान पीएल-15 और पीएल-21 मिसाइलों से लैस है जिनकी रेंज क्रमश: 300 और 400 किलोमीटर है। यह 18 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है जबकि राफेल और एफ-16 इस मामले में काफी पीछे हैं। चीन आने वाले वर्षों में जे-20ए विमानों को अपनी वायुसेना में शामिल कर रहा है। इसे देखते हुए भारतीय वायुसेना को भी अपनी क्षमताओं में इजाफा करना होगा। हालांकि, भारत के लिए अच्‍छी बात यह है कि उसे मीटियोर मिसाइल मिल रही है जिसे BVRAAM (Beyond Visual Range Air to Air Missile) की अगली पीढ़ी की मिसाइल भी कहा जाता है और यह एशिया में किसी दूसरे देश के पास नहीं है।

 


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