पाकिस्तान का विश्वासघात जिसे भूल नही सकता कोई कश्मीरी

धारा 370 के हटने के बाद आज जिस तरह का कश्मीर दिख रहा है वैसा पहले कभी नही दिखा है। हमेशा अमन के दुश्मनों ने अपनी सियासत के चलते कश्मीरियों को निशाना बनाया था जिसमे सिर्फ कश्मीर का अमन चैन ही नही लूटा बल्कि कश्मीर की वादियों में एक आतंक का महौल भी खड़ा किया लेकिन इसकी नींव कैसे पड़ी इसकी कहानी आज हम आपको सुनाते है जम्मू-कश्मीर में हिंसा के बीज 1947 में आज ही के दिन तत्कालीन पाकिस्तान सरकार द्वारा बोए गए थे। जम्मू-कश्मीर के साथ पाकिस्तान के इस विश्वासघात की एक लंबी कहानी है। इसका जम्मू-कश्मीर के साथ दुनिया के लोगों को भी जानना चाहिए।

पाक में विलय  से किया इंकार, पाक सेना ने ‘ऑपरेशन गुलमर्ग’ चलाया

आजादी के बाद जब भारत और पाक दो अलग अलग देश बन गये उसके बाद पाक ने कश्मीर के राजा पर पाकिस्तान में शामिल होने का दबाव बनाया हालाकि कश्मीर के राजा ने पाक में विलय से साफ इंकार कर दिया। जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने ‘ऑपरेशन गुलमर्ग’ शुरू कर दिया। पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर पर सैन्य हमला करने का निर्णय लिया और यह हमला 22 अक्टूबर, 1947 से शुरू हुआ। वह ऑपरेशन गुलमर्ग की तैयारी महीनों से कर रहा था। इस साजिश में न केवल पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री, बल्कि उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत के मुख्यमंत्री, पाकिस्तान के वित्त मंत्री, मुस्लिम लीग के मुख्य नेता और पाकिस्तानी सेना के अधिकारी शामिल थे।खुद जिन्ना ने इस ऑपरेशन को मंजूरी दी थी। तत्कालीन मेजर खुर्शीद अनवर ने श्रीनगर पर हमले के लिए उत्तर-पश्चिमी सीमांत प्रांत के कबीलाइयों का नेतृत्व किया था। शुरू में हथियारबंद दस्ते कोहाला-बारामुला रोड पर गांवों को उजाड़ते हुए तेजी से आगे बढ़े। उन्होंने उड़ी को अपने कब्जे में ले लिया। 26 अक्टूबर को बारामुला पर भी कब्जा कर लिया। वहां वे आगजनी, लूट-खसोट और दुष्कर्म में लग गए। बहुत-सी लड़कियों, औरतों को जबरन उठा लिया। उनमें से कुछ ही बचाई जा सकीं।

कश्मीर के महाराजा ने औपचारिक रूप से राज्य का भारत में विलय किया

कश्मीर में कत्लआम हो रहा था ऐसी स्थिति की भयावहता को देखते हुए कश्मीर के महाराजा ने 24 अक्टूबर को मदद के लिए भारत सरकार से संपर्क किया। फिर औपचारिक रूप से अपने राज्य का भारत में विलय किया। 27 अक्टूबर की सुबह भारतीय सेना की पहली टुकड़ी श्रीनगर हवाईअड्डे पर उतरी। आठ नवंबर को भारतीय सेना ने बारामुला पर वापस कब्जा कर लिया। उस समय तक शहर पूरी तरह से उजड़ चुका था। 15 नवंबर को भारतीय सेना ने उड़ी को वापस हासिल किया और हालात गंभीर होने से पहले ही श्रीनगर, घाटी और उसके आसपास के इलाकों को बचा लिया। इसके साथ ही कश्मीर ऑपरेशन का पहला चरण पूरा हुआ।

मगर इस जंग में पाक हार तो क्या लेकिन वो बीज कश्मीर मेंडाल गया जिसका असर मोदी सरकार के आने से पहले तक देखा जाता था लेकिन आज धारा 370 हटने के बाद हालात बदल चुके है। कश्मीर की आवाम समज चुकी है कि कश्मीर अब नफरत को छोड़कर अमन के रास्ते चल पड़ा है तभी तो अब आतंकी हमले कम और आतंकी मारे गये ज्यादा सुनाई देता है। लेकिन आज का इतिहास वो इतिहास है जो भुलाया नही जा सकता क्योकि इसमे उन लोगों के दर्द छुपे है जिन्हे शब्दो में बया नही किया जा सकता।