आप्रवासी पाकिस्तानियों ने दिखाया अपनी ही सेना और सरकार को आइना

दुनिया भर में आतंकवाद का सरपरस्त घोषित हो चुके पाकिस्तान और वहां की सेना को अपने ही देश के लोगों ने आइना दिखाया है| अमेरिका में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों ने पाकिस्तान की सेना और आतंकवादियों से उनके गठजोड़ के ऊपर अपनी आपत्ति दर्ज की|

आप्रवासी पाकिस्तानियों के असंतुष्ट समूह ने यहां आतंकवाद और मानवाधिकारों के खिलाफ दक्षिण एशियाई सम्मेलन (SAATH) के चौथे संस्करण में भाग लिया और अपने संबोधन में कहा कि, “पाक सेना द्वारा आतंकवादी संगठनों से किसी तरह की मदद देना और लेना निंदनीय है। उन्‍होंने मांग की है पाकिस्‍तान सेना को इन आतंकवादी संगठनों की घरेलू या विदेशी मोर्चे पर उपयोग को समाप्त करना चाहिए। इसके साथ इस समूह ने पाक में लगातार लोकतांत्रित स्‍वतंत्रता के हनन पर भी चिंता जाहिर की है।“

बलूचिस्‍तान में सैन्‍य उत्‍पीड़न को तत्‍काल समाप्‍त करने की उठी मांग

दक्षिण एशियाई सम्मेलन (SAATH) के चौथे संस्करण में पाकिस्तानी नागरिकों ने पाकिस्‍तान के बलूचिस्‍तान प्रांत में सैन्‍य उत्‍पीड़न को तत्‍काल समाप्‍त करने की मांग भी की है। उन्‍होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को हजारों गायब और लापता व्‍यक्तियों को लेखाजोखा रखना चाहिए। समूह ने कहा कि पाकिस्‍तान सरकार को इसके लिए बाकयादा एक आयोग का गठन करना चाहिए जो इन सारे मामलों का निस्तारण कर सके।

समूह ने पाक हुकूमत और सेना दोनों की निंदा की है। उनका कहना था कि पाकिस्‍तान में लगातार सैन्‍य हस्‍तक्षेप से नागरिकों की लोकतांत्रित स्‍वतंत्रता का हनन हो रहा है। इस समूह ने पाकिस्‍तान के नागरिकों और राजनीतिक दलों को संवैधानिक शासन और कानून के शासन की सलाह दी।

पाकिस्तानी नागरिकों के इस समूह में अमेरिका स्थित स्तंभकार मोहम्मद टकी, पूर्व सीनेटर अफरासीब खट्टक, पूर्व राजदूत कामरान शफी, डेली टाइम्स के पूर्व संपादक रहमान, पत्रकार ताहा सिद्दीकी, गुल बुखारी और मारवी सिरमेड शामिल थे।

बता दें कि SAATH सम्मेलन के पिछले संस्करणों का आयोजन इससे पहले वर्ष 2016 और 2017 में लंदन में और 2018 में वाशिंगटन डीसी में किया गया था|