जम्मू-कश्मीर पर भारत के फैसले के खिलाफ पाकिस्तान के पास सीमित विकल्प: अमेरिकी थिंक टैंक

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कश्मीर को लेकर पाकिस्तान लाख हाथ-पैर पटक ले लेकिन दुनिया में कोई उसे गंभीरता से नहीं लेता है। अमेरिकी कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (CRS) की रिपोर्ट में कई विशेषज्ञों ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेंद-370 को हटाए जाने से बौखलाए पाकिस्तान के पास भारत के फैसले पर जवाब देने के विकल्प बिल्कु‍ल सीमित हैं। कांग्रेशनल रिसर्च सर्विस (सीआरएस) ने छह महीनों से कम समय में कश्मीर पर अपनी दूसरी रिपोर्ट में यह भी कहा कि हाल के वर्षों में सैन्य कार्रवाई के जरिए यथास्थिति बदलने की पाकिस्तान की क्षमता भी कम हुई है जिसका मतलब है कि वह मुख्यत: कूटनीति पर निर्भर रह सकता है।

सीआरएस अमेरिकी कांग्रेस की स्वतंत्र शोध शाखा है, जो अमेरिकी सांसदों की रूचि के मुद्दों पर समय-समय पर रिपोर्टें तैयार करती है, ताकि संसद अंतरराष्ट्रीय मामलों पर फैसले ले सके। सीआरएस ने 13 जनवरी की अपनी रिपोर्ट में कहा कि पांच अगस्त के बाद पाकिस्तान कूटनीतिक तौर पर अलग-थलग दिखाई दिया। केवल तुर्की ने इसका समर्थन किया। गौरतलब है की 5 अगस्त को जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा हटाने और उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के मोदी सरकार के फैसले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच के रिश्ते और तनावपूर्ण हो गए।

पाकिस्तान इस मुद्दे पर भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग जुटाने की कोशिश करता रहा है। कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस ने 25 पन्नों की रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान ने चीन के समर्थन से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के सत्र में कश्मीर पर चर्चा की मांग की थी। यूएनएससी ने 16 अगस्त को लगभग 50 साल बाद कश्मीर मुद्दे पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई। हालांकि, यह बैठक बेनतीजा रही। भारत का कहना है कि यह कदम पूरी तरह से उसका आंतरिक मामला है। सीआरएस ने कहा, ‘कई विश्लेषकों का मानना है कि कश्मीर पर आतंकवादी संगठनों को गुपचुप समर्थन करने के पाकिस्तान के लंबे इतिहास को देखते हुए कश्मीर पर उसकी बेहद कम विश्वसनीयता है। पाकिस्तानी नेतृत्व के पास भारत के कदमों पर प्रतिक्रिया देने के विकल्प सीमित हो गए हैं और कश्मीरी आतंकवाद को समर्थन देने से उसे अंतरराष्ट्रीय रूप से इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।’

गौरतलब है कि मंगलवार को वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम से अलग अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान स्विटजरलैंड के दावोस में मुलाकात हुई। इस मुलाकात में ट्रंप ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता करने की बात कही। उन्होंने कहा हम भारत और पाकिस्तान के संबंध में कश्मीर को लेकर अगर मदद कर सकते हैं तो निश्चित रूप से करेंगे।

 


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