दो वक्त के खाने के लिए तरस रहे पाकिस्तान को, अब पानी के लिए भी तरसाने की पूरी तैयारी में भारत

आर्थिक तंगी से गुजर रहे पाकिस्तान के वैसे भी खाने के लाले पड़े हुए है, ऐसे में भारत उसे पानी के किल्लत से भी गुजरने के लिए पूरी तैयारी में जुटा हुआ है | आर्टिकल 370 ख़त्म करने के भारतीय सरकार के फैसले को अन्तराष्ट्रीय मसला साबित करने की पाकिस्तान की हर कोशिश नाकाम हो गयी है | कश्मीर के हाथ से निकलने के बाद और हर जगह से निराशा मिलने से पाकिस्तान हर तरह से पस्त हो चूका है लेकिन फिर भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बार-बार भारत को परमाणु हमले की गीदड़ भबकी दे रहे है | वैसे भी इससे ज्यादा कुछ करने की पाकिस्तान की हैसियत भी नहीं है |

और इसीलिए उसके इस कायरता भरी धमकी का जवाब देने के लिए केंद्रीय जल मंत्रालय ने कहा है की रावी, ब्यास और सतलुज नदी की कई सहायक नदियों का पानी पाकिस्तान की तरफ जाता है और इसलिए भारतीय जल मंत्रालय कोशिश कर रही है की इन नदियों के पानी को पाकिस्तान जाने से रोका जाये |

Union Jal Shakti Minister Gajendra S Shekhawat

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत कहते है की भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सिंधु जल संधि के तहत भारत के बड़े हिस्से का पानी पाकिस्तान में चला जाता है और इसलिए हम कोशिश कर रहे है की इस पनी को पाकिस्तान जाने से रोका जाये और भारत के किसानों को उपलब्ध करवाया जाये | शेखावत ने ये भी बताया की इस काम को जल्द से जल्द अंजाम देने के लिए इससे समिल्लित अधिकारीयों को निर्देश दे दिए गए है |

क्या है सिन्धु जल संधि और कब बनी ये संधि ?

सिन्धु जल संधि सन 1960 में बनायीं गयी थी जिसे भारत के प्रथम प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरु और पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अयूब खान के कार्यकाल में बनाया गया था | दोनों ही राष्ट्राध्यक्षों ने इस संधि पर हस्ताक्षर भी किये थे |
सिन्धु जल संधि के अंतर्गत ये तय किया गया था की भारत की पूर्व नदियाँ रावी, ब्यास और सतलुज के पानी पर पूरी तरह से अधिकारिक हक़ भारत का होगा वहीँ पश्चिमी नदियां जैसे सिंधु, चिनाब और झेलम के पानी को बिना किसी रुकावट या बाधा के भारत को पाकिस्तान को देना होगा |

हालाँकि संधि के अनुसार भारत भी इन नदियों के पानी का इस्तेमाल कर सकता है पर सिर्फ घरेलू, सिंचाई और हाइड्रोपावर प्रोडक्शन के लिए | वहीँ कल पुर्जों के कारखाने के लिए भारत इन नदियों के पानी का इस्तेमाल नहीं कर सकता है |

खैर ये तो एक बात हुई पर रोचक खबर तो यही है की अब भारत पाकिस्तान को पानी-पानी के लिए भी मोहताज़ करने की कवायद में पूरी तरह से जुट गया है | सूत्रों का मानना है की ये फैसला पाकिस्तान के कायर धमकियों का जवाब देने के लिए लिया गया है | और इस फैसले के बाद उम्मीद यहीं रहेगी की अब कहीं जाकर पाकिस्तान के अकल का ताला खुलेगा और भारत को धमकियाँ देने के बजाये अपनी जनता की भलाई के बारे में सोचेगा |